लखनऊ: सीएम योगी ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में महर्षि वाल्मीकि जयंती कार्यक्रम का किया शुभारंभ

Lucknow Focus News Desk: राजधानी लखनऊ में मंगलवार को महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के ज्यूपिटर हॉल में हुए इस कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीप प्रज्वलन कर किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ-साथ कई प्रमुख राजनेता मौजूद रहे। कार्यक्रम में उप-मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, सांसद दिनेश शर्मा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, मंत्री जयवीर सिंह और मेयर सुषमा खर्कवाल समेत अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। यह आयोजन राज्य में महर्षि वाल्मीकि के सम्मान और उनके द्वारा रचित रामायण के मूल्यों के प्रचार-प्रसार के लिए किया गया।
सीएम योगी ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि भारत के महापुरुषों की परंपरा के भाग्य विधाता हैं। तप और साधना से तपे हुए ऋषि को जब लेखनी चलानी थी, तब लोककल्याण व मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने और नई कृति की रचना के लिए उन्होंने हजारों वर्ष पहले देवर्षि नारद से प्रश्न किया कि चरित्र से युक्त कौन ऐसा व्यक्ति है, जिसके बारे में मैं कुछ लिख सकूं, क्योंकि महर्षि वाल्मीकि जानते थे कि चरित्र से युक्त व्यक्ति ही लोककल्याण व राष्ट्र कल्याण का माध्यम बन सकता है। स्वामी विवेकानंद जब शिकागो की धर्मसभा में गए तो उनकी वेशभूषा देख विदेशी हंस रहे थे। तब उन्होंने कहा कि तुम्हारी पहचान पहनावे से बनती है, लेकिन हमारे देश और हमारी पहचान चरित्र से बनती है। हमारे लिए चरित्र महान है।
भगवान वाल्मीकि का कृतज्ञ है मानव समाज
सीएम योगी ने कहा कि वाल्मीकि रामायण लिखते समय उन्होंने पूरी कथा को राम पर आधारित किया। उन्होंने यह भी बताया कि राम को क्यों आधार बनाया, क्योंकि राम ही साक्षात धर्म हैं। मानव समाज भगवान वाल्मीकि का कृतज्ञ है। जब भी किसी भारतीय के मन में संदेह पैदा होता है तो महर्षि वाल्मीकि ने हर स्थिति में जो आदर्श रखा, वह मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का था। उन्होंने राम के चरित्र को दिया, जो हर काल, देश, परिस्थिति में प्रासंगिक है। भाई-भाई, पिता-पुत्र, मां-बेटे, राजा-प्रजा में क्या रिश्ते होने चाहिए, उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम कहकर यह भाव भरा। राम ने मर्यादा की लक्ष्मण रेखा का कभी उल्लंघन नहीं किया।




