
राजधानी के एक बड़े संस्थान की मुखिया मैडम और ‘छोटे सर’ में ऐसी ठनी कि इसकी चर्चा पूरे प्रदेश में फैल गई। लोगों ने खूब चटकारे ले-लेकर मजे लिए। दोनों ही पक्ष कम नहीं थे। न मैडम, न ‘छोटे सर’। अपनी नाक ऊंची रखने के लिए दोनों ने अपनी-अपनी पूरी ताकत झोंक दी। ‘छोटे सर’ के पीछे की लॉबी भी उनके पीछे चट्टान की तरह आकर लग गई। कह दिया-तुम झुकना नहीं। हम सब तुम्हारे साथ हैं। बस इसी तरह स्टैंड लिए रहो। ‘छोटे सर’ भी अपेक्षाओं पर खरे उतरे और मैडम के सामने ‘अंगद के पांव’ की तरह अड़े रहे। जरा भी नहीं डिगे। ब्रह्मास्त्र के रूप में मैडम ने अपने राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल करना चाहा लेकिन पता नहीं क्यों पीछे हट गईं…। शायद उन्हें समझ में आ गया कि हर जगह ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करने से उसकी महत्ता खत्म हो जाएगी। फिलहाल दोनों के बीच की लड़ाई बराबरी पर छूटी है लेकिन चूंकि इस दिलचस्प मैच के ड्रा होने की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, इसलिए दोनों पक्ष किसी भी दिन फिर से अखाड़े में उतर सकते हैं। संस्थान के कर्मचारियों को उसी दिन यानी इस सीजफायर के खत्म होने का इंतजार है। संस्थान के कर्मचारियों क्यों, दूसरे लोग भी इसका शिद्दत से इंतजार कर रहे हैं।
वनवास बढ़ता ही जा रहा ‘चौहान साहब’ का
पिछले साल दीपावली के कुछ ही दिनों पहले कानपुर मंडल के एक जिले से ट्रांसफर करके राजधानी में ‘दाखिल दफ्तर’ कर दिए एक साहब को लग रहा था कि इस दीपावली के बाद उनका वनवास खत्म हो जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दीपावली के बाद जो-जो तबादला एक्सप्रेस चलीं, उसमें किसी में भी उन्हें सवार होने का मौका नहीं मिला। जबकि उनके उच्चस्तरीय सूत्र ने उन्हें पूरी तरह से आश्वस्त किया था कि इस बार जबर्दस्त पावर लगाया है, जिसका सुफल सामने आएगा ही आएगा …किंतु सब व्यर्थ…। साहब, जिन्हें उनके साथ वाले अफसर पृथ्वीराज चौहान कहते हैं और उन्हें बहुत बड़ा ‘धनुर्धर’ मानते हैं, अब बहुत परेशान हो गए हैं। इन ‘चौहान साहब’ को लगता है कि उन्हें अभी और वनवास काटना पड़ेगा। उन्हें नौकरी का यह स्वर्णकाल मक्खी मारते हुए बिताना बहुत खल रहा है।
नहीं, परिणाम अच्छे आएंगे ही आएंगे
नौकरशाही के सबसे बड़े केंद्र में दो वरिष्ठ बैचमेट आफिसर बहुत दिनों बाद मिले तो पुरानी यादें ताजा की गईं। बातें करते-करते बहनजी का सत्ताकाल याद किया जाने लगा। एक ने पूछा कि क्या तुम्हें लगता है कि बहनजी इस बार विधानसभा चुनाव में कुछ अच्छा प्रदर्शन कर पाएंगी? दूसरे आफिसर बोले-मुझे तो नहीं लगता कि उनकी पार्टी दुबारा उठ पाएगी। इस पर पहले बोले- नहीं, मुझे तो लगता है कि इस बार उनका प्रदर्शन अच्छा रहेगा। क्योंकि उनकी पार्टी इस समय बूथ-लेवल मैनेजमेंट पर फोकस करके बहुत तेजी से काम कर रही है। इसके अच्छे परिणाम आने ही आने हैं। इस पर दूसरे सज्जन फिर बोले-हो सकता है पर मुझे तो ऐसा नहीं लगता। इस पर पहले आफिसर बोले-नहीं, परिणाम अच्छे आएंगे ही आएंगे। तुम बहनजी के बारे में मुझसे ज्यादा नहीं जानते। मैंने उन्हें बहुत निकटता से देखा है। जिस तरह उनके लोग क्षेत्र में काम कर रहे हैं, चुनाव बाद वह और उनकी पार्टी मजबूत स्थिति में उभरेंगी।
अब जो होगा-बिहार चुनाव के बाद ही होगा
सत्ताधारी पार्टी के आफिस में उस समय गिने-चुने लोग ही थे। अगर कहा जाए कि सन्नाटा था तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। वैसे ऐसा सन्नाटा बहुत कम होता है लेकिन लगता है कि सारे ही नेता बिहार चुनाव में चले गए थे। एक बुजुर्गवार नेताजी, जो बुंदेलखंड के एक जिले से आए थे, राजधानी के एक पार्टी नेता से टकराए तो पूछ बैठे-प्रदेश अध्यक्ष की क्या अपडेट है? राजधानी वाले नेताजी ने जवाब दिया-कुछ नहीं, अब तो जो कुछ होगा-बिहार चुनाव के बाद ही होगा। इस पर बुंदेलखंड से आए नेताजी बोले-लगता तो मुझे भी यही है। अभी तो केंद्र वाला अध्यक्ष भी तय होना है। इसके बाद बातचीत का विषय क्या हो, यह शायद दोनों की ही समझ में नहीं आया, क्योंकि इसके बाद दोनों ही ऊपर लगे सीलिंग फैन को बड़ी तन्मयता के साथ घूरने लगे।




