‘नेशनल हेराल्ड की लूट’, बांसुरी स्वराज का बैग बना कांग्रेस पर वार का हथियार, बढ़ी सियासी हलचल

बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने एक बार फिर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। इस बार उन्होंने ऐसा किया अपने काले रंग के बैग के ज़रिए, जिस पर लाल अक्षरों में लिखा था – ‘नेशनल हेराल्ड की लूट’। मंगलवार को वन नेशन, वन इलेक्शन को लेकर हो रही JPC बैठक में हिस्सा लेने पहुंचीं बांसुरी ने अपने बैग के ज़रिए विपक्ष को करारा संदेश दिया।
बैग से दिया बड़ा राजनीतिक संदेश
बैठक के लिए जब बांसुरी स्वराज पार्लियामेंट एनेक्सी बिल्डिंग पहुंचीं, तो उनका काला बैग सबका ध्यान खींचने लगा। मीडिया ने जब उनसे इस प्रतीकात्मक विरोध पर सवाल किया, तो उन्होंने कहा “यह पहली बार है जब लोकतंत्र के चौथे स्तंभ – मीडिया में भी भ्रष्टाचार के उदाहरण सामने आए हैं। हाल ही में ईडी की जो चार्जशीट आई है, वह कांग्रेस की पुरानी कार्यशैली और सोच को उजागर करती है।”
कांग्रेस पर तीखा वार
बांसुरी स्वराज ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह “सेवा” के नाम पर सार्वजनिक संस्थानों को अपनी निजी जागीर बनाने का प्रयास करती है। उन्होंने कहा “करीब 2,000 करोड़ की संपत्ति को मात्र 50 लाख रुपये में हड़प लिया गया, वह भी एक ऐसी कंपनी के ज़रिए जिसकी 76% हिस्सेदारी गांधी परिवार के पास है यानी ‘यंग इंडियन लिमिटेड’। कांग्रेस को इस मामले में जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।”
क्या है नेशनल हेराल्ड मामला?
नेशनल हेराल्ड अखबार की स्थापना 1938 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी। इसका संचालन एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) द्वारा होता था। 2012 में सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका के बाद इस मामले ने कानूनी मोड़ लिया।आरोप है कि यंग इंडियन लिमिटेड (YIL) नामक कंपनी ने AJL की संपत्तियों को संदिग्ध तरीकों से हड़प लिया। इस कंपनी की 76% हिस्सेदारी राहुल गांधी और सोनिया गांधी के पास है। ED (प्रवर्तन निदेशालय) ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच की और हाल ही में चार्जशीट दाखिल की है। इसमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के नाम शामिल हैं।
ED के आरोप क्या हैं?
यंग इंडियन लिमिटेड के ज़रिए AJL की संपत्तियों का अधिग्रहण किया गया। यह अधिग्रहण 50 लाख में 2,000 करोड़ की संपत्ति के बराबर बताया गया है। आरोप है कि यह लेन-देन धोखाधड़ी, हेराफेरी और धनशोधन की श्रेणी में आता है।
राजनीतिक मायने क्या हैं?
बांसुरी स्वराज के इस प्रतीकात्मक विरोध ने संसद भवन परिसर में मीडिया का ध्यान खींचा और बीजेपी के उस नैरेटिव को मज़बूती दी, जिसके तहत पार्टी कांग्रेस को नेशनल हेराल्ड घोटाले को लेकर लगातार घेर रही है। यह संदेश यह भी देता है कि यह मामला पार्टी के लिए सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक अभियान का हिस्सा भी है।
बांसुरी स्वराज का यह ‘बैग स्टेटमेंट’ एक बार फिर यह दिखाता है कि भारतीय राजनीति में प्रतीकों की ताकत कितनी गहरी होती है। यह भी साफ है कि बीजेपी, नेशनल हेराल्ड मामले को आने वाले चुनावी माहौल में भी हथियार बनाकर इस्तेमाल करने की तैयारी में है।