लखनऊ

भारतीय ज्ञान परम्परा पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन: लखनऊ में गूंजे पुनर्जागरण के स्वर

कालीचरण पी.जी. कॉलेज, लखनऊ में “भारतीय ज्ञान परम्परा: विविध आयाम” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में भारत की गौरवशाली शिक्षा व्यवस्था, उसकी ऐतिहासिक विरासत और उसे पुनः स्थापित करने के उपायों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।

कार्यक्रम की शुरुआत माँ सरस्वती की वंदना और स्वागत गीत से हुई। महाविद्यालय के प्रबंधक इं. वी.के. मिश्र ने मुख्य अतिथि प्रो. जे.पी. पाण्डेय (कुलपति, ए.के.टी.यू., लखनऊ) एवं मुख्य वक्ता प्रो. आर.पी. मिश्र (पूर्व डीन, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय) का पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र एवं स्मृतिचिह्न भेंट कर अभिनंदन किया।

अपने स्वागत भाषण में मिश्र ने भारत की प्राचीन शिक्षा प्रणाली को खगोल, गणित, चित्रकला, विज्ञान, वास्तु एवं ज्योतिष जैसे विविध क्षेत्रों में विश्वप्रेरक बताते हुए आत्मनिर्भर राष्ट्र निर्माण पर बल दिया।

मुख्य अतिथि प्रो. जे.पी. पाण्डेय ने अपने वक्तव्य में गुरु-केंद्रित शिक्षा प्रणाली की प्रशंसा करते हुए कहा कि “आज भारत को पुनः चाणक्य जैसे शिक्षकों की आवश्यकता है जो शिक्षा, संस्कृति और मानवता का सामंजस्य स्थापित कर सकें।”

प्रमुख वक्ता प्रो. आर.पी. मिश्र ने भारतीय शिक्षा को संवेदनशीलता और प्रकृति के साथ समन्वय पर आधारित बताया। उन्होंने वर्तमान शिक्षा प्रणाली को छात्रों को संवेदनहीन बनाने वाला करार दिया।

प्राचार्य प्रो. चन्द्र मोहन उपाध्याय ने संगोष्ठी को “पुनर्जागरण की ओर एक ठोस पहल” बताया और शोध व नवाचार के माध्यम से विश्वपटल पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का आह्वान किया।

समापन सत्र में पूर्व मंत्री प्रो. सतीश चन्द्र द्विवेदी ने “वसुधैव कुटुम्बकम्” के भारतीय दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान सम्पदा सम्पूर्ण मानवता के लिए है। वहीं, प्रबंध समिति के सदस्य अमित टंडन ने इस प्रकार के आयोजनों को युवा पीढ़ी के मार्गदर्शन के लिए अत्यंत आवश्यक बताया।

पैनल चर्चा में प्रो. मंजुला उपाध्याय, प्रो. मनोज कुमार पाण्डेय, प्रो. सारिका दुबे, प्रो. बीना राय, प्रो. अनिल कुमार सिंह, प्रो. रचना श्रीवास्तव सहित कई विद्वानों ने भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न पहलुओं पर विचार साझा किए।

तीन तकनीकी सत्रों में देशभर से आए शोधार्थियों ने लगभग 190 शोधपत्र प्रस्तुत किए। इन सत्रों का संचालन प्रो. अर्चना मिश्रा, प्रो. मीना कुमारी एवं डॉ. अरुण कुमार यादव ने किया।

संगोष्ठी में देश के 15 राज्यों से लगभग 340 प्रतिभागियों ने ऑनलाईन एवं ऑफलाइन माध्यम से सहभागिता की। धन्यवाद ज्ञापन हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. मनोज कुमार पाण्डेय ने किया। अंत में सह-संयोजक डॉ. मुकेश कुमार मिश्र ने संगोष्ठी की रिपोर्ट प्रस्तुत की।

इस अवसर पर लखनऊ एवं आस-पास के कई प्रतिष्ठित महाविद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षकगण, शोधार्थी व विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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