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NPCI ने लॉन्च की नई सुविधा, अब पैन और बैंक अकाउंट का वेरिफिकेशन होगा और भी आसान

Lucknow Focus News Desk: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने वालों के लिए अब पैन और बैंक अकाउंट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया और भी सरल हो गई है। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने टैक्सपेयर्स और सरकारी विभागों की सुविधा के लिए एक नई तकनीकी सुविधा शुरू की है, जिससे इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर पैन और बैंक खाता विवरण का वेरिफिकेशन रियल टाइम में किया जा सकेगा।

इस नई प्रणाली के तहत, NPCI ने एक एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API) विकसित किया है, जो पैन डिटेल्स, बैंक अकाउंट स्टेटस और खाता धारक के नाम की जानकारी को सीधे बैंकों के कोर बैंकिंग सिस्टम (CBS) से जोड़ता है। इससे वेरिफिकेशन की प्रक्रिया न केवल तेज होगी बल्कि पूरी तरह से सुरक्षित भी रहेगी।

सरकारी विभागों के लिए खासतौर पर तैयार की गई सुविधा

NPCI द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, यह API मुख्य रूप से सरकारी संस्थाओं और विभागों के लिए डिजाइन की गई है ताकि वे अपने ग्राहकों (टैक्सपेयर्स) के पैन और बैंक विवरण का सत्यापन बिना किसी देरी और मानवीय त्रुटि के कर सकें। API एक ऐसा डिजिटल पुल है जो दो तकनीकी प्रणालियों को जोड़कर डेटा को रियल टाइम में सुरक्षित रूप से शेयर करने में मदद करता है।

क्या बदलेगा इस सुविधा से?

  • पैन और बैंक खाता लिंक करने की प्रक्रिया होगी तेज
  • मानव त्रुटियों में आएगी भारी कमी
  • टैक्स रिफंड और भुगतान होंगे ज्यादा फास्ट
  • डेटा वेरिफिकेशन होगा ज्यादा सिक्योर और विश्वसनीय
  • वैलिडेशन स्टेटस का अपडेट जल्दी मिलेगा (अब 10-12 वर्किंग डे तक इंतज़ार नहीं)

बैंकों से मिली प्राथमिकता से लागू करने की अपील

NPCI ने सभी सदस्य बैंकों से इस API को प्राथमिकता के साथ लागू करने का अनुरोध किया है, क्योंकि यह सेवा भारत सरकार और टैक्सपेयर्स के बीच की प्रक्रिया को डिजिटल रूप से और अधिक प्रभावी बनाएगी।

इस नई सुविधा के चलते अब टैक्स रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक सहज, तेज और पारदर्शी हो जाएगी। इससे उन लाखों टैक्सपेयर्स को राहत मिलेगी जो हर साल पैन और बैंक वेरिफिकेशन जैसी तकनीकी प्रक्रियाओं में अटक जाते थे।

NPCI की इस नई पहल से टैक्सपेयर्स और सरकारी विभागों के लिए टैक्स वेरिफिकेशन प्रक्रिया पहले से काफी आसान और विश्वसनीय हो गई है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में यह सुविधा टैक्स सिस्टम में डिजिटल दक्षता और पारदर्शिता को एक नए स्तर पर ले जाएगी।

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