एंडोवस्कुलर एम्बोलाइजेशन प्रक्रिया से मरीज को मिला नया जीवन


(सीनियर एडवाइजर सहारा इंडिया परिवार अनिल विक्रम सिंह, वरिष्ठ गैस्ट्रो सर्जन डॉ.पुनीत गुप्ता, मरीज माधुरी सिंह व परिजन।)
– सहारा हॉस्पिटल में गम्भीर मरीज की बिना ऑपरेशन खून की नस को बन्द कर बचायी गयी जान
लखनऊ फोकस ब्यूरो
लखनऊ। सुल्तानपुर के बड़डाड की निवासी माधुरी सिंह (50 वर्षीय) टहलने जा रही थीं, तभी एक बाइक सवार ने टक्कर मार दी और वह बेहोश हो गयीं। आनन-फानन में उन्हें स्थानीय हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। डाक्टर ने बताया कि मरीज के लिवर के रक्त के थक्के बन गए हैं और काफी चोटें भी आयी हैं। इलाज के जरिए पहले खून का रिसाव कम किया गया। फिर आठ दिन चले इलाज के बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी दी गयी लेकिन कुछ दिन बाद अचानक मरीज के पेट में तेज दर्द उठा। मरीज को पहले से शुगर और बीपी की समस्या थी।
अपने परिचित की सलाह मानते हुए परिजनों ने मरीज को सहारा हॉस्पिटल में वरिष्ठ गैस्ट्रो सर्जन डॉक्टर पुनीत गुप्ता के अंतर्गत भर्ती कराया। इमरजेंसी में उनकी सलाह पर अल्ट्रासाउंड करवाया तो पता चला कि लिवर में लैसरेशन है और हीमोपेरोटियम भी है। इसके बाद डॉ. पुनीत ने मरीज की सी.टी. एंजियोग्राफी की जांच भी करवायी, जिससे पता चला कि लिवर की राइट लोब की खून की नस फट चुकी थी और उसमें से लगातार खून का रिसाव हो रहा था, जिसके कारण मरीज का हीमोग्लोबिन 10 से 7 हो गया था। वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर चंदन मौर्य एवं डॉक्टर शामिक विस्वास ने मरीज की सर्जरी और एंडोवस्कुलर एम्बोलाइजेशन यानी बिना ऑपरेशन किए खून की नस को बंद करने का ऑप्शन बताया। एंडोवस्कुलर प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का चीरा नहीं लगता है और ना ही मरीज को बेहोश किया जाता है और मरीज को होश में रखते हुए इस प्रक्रिया को पूर्ण किया जाता है। मरीज के परिजनों ने एंडोवस्कुलर प्रक्रिया से इलाज करवाने की सहमति दे दी। फिर इमरजेंसी से मरीज को सीधे कैथ लैब में शिफ्ट करके 4 घंटे के भीतर ही इस प्रक्रिया को सफलतापूर्वक किया गया। अगर सही समय पर मरीज को इलाज न मिलता तो वह शॉक में जा सकती थी और इसकी वजह से उनकी जान जाने की आशंका बढ़ सकती थी। इस प्रक्रिया को करने के बाद मरीज का हीमोग्लोबिन तो सामान्य हो गया, साथ ही साथ पेट के अंदर जो खून में रिसाव था वह भी बन्द हो गया। इस प्रक्रिया को पूर्ण करने के दौरान मरीज को लगभग 3 यूनिट ब्लड भी चढ़ाया गया।
इस प्रक्रिया को पूरा करने के बाद गैस्ट्रो सर्जन डॉ. पुनीत गुप्ता के अंतर्गत ऑब्जर्वेशन में रखा गया। मरीज को पूर्णतः ठीक होने के बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। परिजनों ने सहारा हॉस्पिटल के वरिष्ठ रेडियोलाजिस्ट डॉ. चंदन मौर्य, डॉ. शामिक विश्वास को इलाज के लिए धन्यवाद दिया । डॉ.चन्दन मौर्य ने बताया कि सहारा हॉस्पिटल में मौजूद अत्याधुनिक कैथ लैब की सुविधा प्रदेश के गिने-चुने अस्पतालों में ही उपलब्ध है।
मरीज के परिवारीजनों ने इलाज के दौरान पोस्ट ऑपरेटिव केयर में फिजिशियन डॉ. दीपाली मोहंती, छाती व श्वास रोग विशेषज्ञ डॉक्टर मनोज अग्रवाल एवं गैस्ट्रोलॉजिस्ट डॉ. दयाराम के योगदान को सराहनीय कहा और डॉक्टर पुनीत गुप्ता को इलाज करने की सही सलाह देने पर आभार व्यक्त किया।




