उत्तर प्रदेश

पाॅल ब्रास के राजनैतिक निष्कर्ष आज भी प्रासंगिक : प्रो. ऋषिकेश सिंह

शास्त्री महाविद्यालय में अमेरिकी चिंतक पाॅल रिचर्ड ब्रास की प्रथम जयंती  पर व्याख्यान का आयोजन
लखनऊ फोकस न्यूज
गोण्डा। गोण्डा की राजनीति व क्षेत्रवाद पर विशेष अध्ययन करने सहित भारतीय राजनीति के अध्येता व अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों के राजनीतिक वैज्ञानिक पाल रिचर्ड ब्रास की प्रथम जन्म जयंती पर लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज में बुधवार को व्याख्यान माला का आयोजन शोध केन्द्र, राजनीति विज्ञान विभाग एवं आई क्यू ए सी के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
  व्याख्यान माला के मुख्य वक्ता श्री कृष्ण गीता राष्ट्रीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, लालगंज, आजमगढ़ के प्राचार्य प्रो. ऋषिकेश सिंह ने कहा कि अमेरिका के वाशिंग्टन विश्वविद्यालय के हेनरी एम जैक्सन स्कूल आफ इंटरनेशनल स्टडीज में राजनीति विज्ञान और अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों के प्रो. पाॅल रिचर्ड ब्रास ने भारतीय राजनीति में क्षेत्रीयता, जाति, धर्म का विश्लेषण कर जो निष्कर्ष 1960 के दशक में दिया था, कई दशक गुजर जाने के बाद भी उनके निष्कर्ष आज भी प्रासंगिक हैं। श्री सिंह ने कहा कि हमारे लिए पाॅल ब्रास इसलिए उपयोगी हैं क्योंकि उन्होने गोण्डा भ्रमण कर यहां की राजनीति पर विशेष शोध कर कहा था कि यहाँ  पारिवारिक राजनीति का दखल व दबदबा है। श्री सिंह ने कहा कि 08 नवंबर 1936 को अमेरिका में जन्में पाल रिचर्ड ब्रास ने  भारत आकर 27 वर्षों तक यहां की राजनीति का गहन विश्लेषण किया। उनके ग्रंथ राजनीति व सामाजिक क्षेत्र में रुचि रखने वाले प्रत्येक नागरिक के लिए उपयोगी हैं।
 कार्यक्रम के संयोजक शोध निदेशक प्रो. शैलेन्द्र नाथ मिश्र ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए पाॅल रिचर्ड ब्रास के साथ अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि हमें यह सौभाग्य मिला कि 1984 में लखनऊ विश्वविद्यालय में अध्ययन के दौरान  उनका सानिध्य मिला। उनके साथ राजनैतिक विषयों पर चर्चा के साथ उनके भाषागत समस्याओं पर सहयोग किया। व्याख्यान में राजनीति विज्ञान के अध्यक्ष प्रो. अतुल कुमार सिंह ने विषय प्रवर्तन करते हुए पाॅल ब्रास का परिचय देने के क्रम में कहा कि आधुनिक भारतीय राजनीतिक विचारकों में पाल ब्रास का विशिष्ट स्थान है। प्रो. आर एस सिंह समन्वयक आईक्यूएसी भारत की भावी राजनीति में ब्रास के चिंतन की उपयोगिता को रेखांकित किया।
 कार्यक्रम का शुभारम्भ प्राचार्य प्रो. रवीन्द्र कुमार  व मुख्य अतिथि द्वारा सरस्वती माता के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। डॉ. बैजनाथ पाल के संचालन में आयोजित व्याख्यान माला में प्रो. बीपी सिंह, प्रो.आरवीएस बघेल, प्रो. राव, प्रो. शिव शरण शुक्ल, प्रो. संदीप श्रीवास्तव, प्रो. जयशंकर तिवारी, प्रो. अमन चंद्रा, प्रो.जे बी पाल, प्रो. अभय कुमार श्रीवास्तव, प्रो. शशि बाला, डॉ. शैलेश कुमार, डॉ. पुष्यमित्र मिश्र, डॉ. परवेज आलम, डॉ. ममता शुक्ला, डॉ. चमन कौर, डॉ. वंदना भारतीय,  मनीष शर्मा, डॉ. घनश्याम द्विवेदी, अभिक सिंह, डॉ. अवधेश वर्मा,  अच्युत शुक्ल, साध्वी सिंह, महाविद्यालय परिवार के अन्य शिक्षक साथियों के साथ साहित्य भूषण शिवाकांत मिश्र विद्रोही आदि की उपस्थिति चिंतन की गंभीरता को रेखांकित कर रही थी। कार्यक्रम में महाविद्यालय के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

 

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