लखनऊ

डॉक्यूमेंटरी फिल्म के जरिये फोटोग्राफर जलज को याद किया


DECEMBER 23, 2020
कैफे रेपर्टवा में विजनरी फोटोग्राफर जलज यादव की याद में कार्यक्रम

(कार्यक्रम में जलज यादव के पोर्टफोलियो का विमोचन करते गणमान्य अथितिगण। (बाएं से) डॉ. वंदना सहगल, भूपेश राय, अनिल रस्तोगी, आत्मप्रकाश मिश्र, राकेश शर्मा एवं अखिलेश निगम। (सबसे ऊपर) पोर्टफोलियो से साभार ली गई जलज यादव द्वारा खींची गई मां दुर्गा की एक फोटो।)
लखनऊ फोकस डेस्क
लखनऊ। युवा फ़ोटोग्राफ़र जलज यादव के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म की प्रस्तुति मंगलवार शाम को फैजाबाद रोड स्थित कैफ़े रेपर्टवा में की गई। इस मौके पर शहर के गणमान्य लोगों ने दिवंगत जलज यादव के साथ की स्मृतियों को साझा करते हुए उनके निधन को कला जगत की अपूरणीय क्षति बताया।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत के साथ हुई। जलज के व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित एक आठ मिनट की डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म दिखाई गई। फ़िल्म में लगभग जलज के उन सभी पलों को सहेजने की कोशिश हुई जो उनके जीवन और कला से जुड़ी रहीं। अतिथियों और उपस्थित लोगों ने जलज को याद करते हुए कहा कि इतने कम समय में भी उनके द्वारा दिया हुआ योगदान अतुलनीय है।
दूरदर्शन के सहायक निदेशक (कार्यक्रम) आत्म प्रकाश मिश्र ने कहा कि आज जितने भी महान लोगों की हम चर्चा करते हैं, उनमें से कई ऐसे लोग रहे, जो कम उम्र में ही इस संसार से विदा हो गये। लेकिन इतने कम समय में भी उन्होंने बहुत कुछ किया। जलज उन्हीं लोगों में से हैं।

(कार्यक्रम में जलज यादव को याद करते वरिष्ठ कला समीक्षक अखिलेश निगम। कार्यक्रम संचालक भूपेंद्र अस्थाना (बैठे हुए)।)
अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी में फैकल्टी आफ आर्किटेक्चर की प्रिंसिपल और डीन प्रोफेसर वंदना सहगल ने पिछले साल होटल लेबुआ में हुए जलज के एक आर्ट कैम्प की यादें साझा करते हुए उन्हें अपने काम के प्रति समर्पित युवा बताया।
जाने-माने थियेटर आर्टिस्ट अनिल रस्तोगी ने बेहद भावुक शब्दों में जलज को श्रद्धांजलि अर्पित की। पूर्व जज राकेश शर्मा ने अस्थाना आर्ट फोरम के लॉकडाउन के दौरान द बापू… ऑनलाइन कैम्प में जलज के कलाकृति को याद करते हुए अपनी बात कही। वरिष्ठ कला समीक्षक एवं पेंटर अखिलेश निगम ने जलज के छायाचित्रों और फोटोग्राफी में दिए गए योगदान को याद करते हुए उन्हें याद किया।
कार्यक्रम के संचालन चित्रकार व क्यूरेटर भूपेंद्र कुमार अस्थाना ने जलज यादव की अल्पावधि की कला यात्रा और जीवन से संबंधित कई जानकारियां साझा की। जलज के बड़े भाई चित्रकार धीरज यादव ने भाई के बचपन से जुड़ी कई बातें बताईं। उन्होंने बताया कि किस तरह पारिवारिक और कलात्मक परिवेश में जलज ने अपना संघर्ष शुरू किया था।
कार्यक्रम के अंत मे मुकेश प्रजापति “मधुर” ने अपने बाँसुरी वादन से जलज के स्मृति में सांध्यकालीन राग मारवा की प्रस्तुति दी। धीरज यादव ने सभी गणमान्य लोगों का आभार जताया। इस मौके पर पोर्टफोलियो का विमोचन भी हुआ। कैफे रेपर्टवा के फाउंडर भूपेश राय का विशेष योगदान रहा।
एक विजनरी फोटोग्राफर थे जलज
जलज यादव मूल रूप से प्रयागराज के निवासी थी। उनका जन्म आठ फरवरी, 1990 को हुआ था। आकस्मिक निधन 23 अक्टूबर, 2020 को मात्र 30 वर्ष की अवस्था में हो गया। अपनी आयु के कम समय मे जलज ने फोटोग्राफी के क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण स्थान बनाया। जलज के छायाचित्रों को देखकर प्रतीत होता है कि वे एक युवा सोच के दूरद्रष्टा फोटोग्राफर थे।

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