विशेष
कविता-प्यार


प्यार
हम पत्थरों में चुनवाते नहीं
हम पत्थर काट कर राह बनाते हैं
हम प्यार को याद नहीं करते
हमारी बुनियाद ही प्यार है
प्यार परिकल्पना नहीं
प्यार हकीक़त है
प्यार लाल – पीला नहीं
बस तेरे रंगों में रंग जाना ही प्यार है
प्यार तेल नहीं
ना ही प्याज है प्यार
नहीं नहीं दाल भी नहीं है प्यार
ना ही रोजगार है प्यार ।
हाँ भाई
एक नयी शुरुआत की आवाज़ है प्यार
ईमान की पहचान है प्यार
चाल है नंदलाल की
विश्वास है मैथिली की
प्यार तकरार है
प्यार आगाह है
तुम्हारा प्यार बूंदा- बांदी नहीं
लड्डुओं से भरा थाल है
तेरा प्यार भगवा नहीं
केसरिया है जो भरता है बल मुझमें
बस तुम्हारा प्यार।

– पवन कुमार पाण्डेय



