लखनऊ

घुमंतू भाषा संबंधी विमर्श के साथ बुंदेली राई लोकनृत्य की प्रस्तुति 

लखनऊ फोकस ब्यूरो
लखनऊ (वि.)। जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद, भोपाल (म. प्र.) एवं सोसायटी फॉर एण्डेंजर्ड एंड लैसर नोन लैंग्वेजज , लखनऊ (SEL) संस्था के संयुक्त तत्वावधान में घुमंतू भाषा शब्द संचय प्रविधि (द्वितीय शिविर) का आयोजन 20 से 22 दिसंबर, 2024 को बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ (उ. प्र.) में किया जा रहा है, जिसके दूसरे दिन विशेषज्ञ डॉ.कविता रस्तोगी, शिवम् शर्मा, डॉ सत्या सोनी, डॉ श्रीकृष्ण काकड़े, शिवाजी राय ,डॉ योग्यता भार्गव, डॉ दीपा कुचेकर, डॉ लक्ष्मीकांत चंदेला आदि अध्येताओं ने शब्द संचय पर अनुभव व्यक्त किये।
विशेषज्ञ प्रो. कविता रस्तोगी ने घुमंतू समुदायों के शब्द संचय प्रविधि और उसकी वर्तमान प्रासंगिकता और अपनी बात रखी। उन्होंने शिविर में भाषा संबंधी तकनीकी जानकारियाँ साझा की, साथ ही फ़ील्ड में घुमंतू समुदायों के शब्दों को संकलित करने के दौरान कौन-कौन सी बातों का ध्यान रखना चाहिए, इस पर भी विस्तार से बात की।
इसके उपरांत पारधी समुदाय व बेड़िया समुदाय के सांस्कृतिक पक्षों पर अध्येताओं ने अपने विचार रखे। पारधी समुदाय के सांस्कृतिक पक्षों पर डॉ. श्रीकृष्ण काकड़े ने उद्बोधन दिया। वहीं डॉ. सत्या सोनी और शिवम शर्मा ने बेड़िया समुदाय के विविध पक्षों पर अपनी बात रखी। शिवम ने बताया कि राई के दानों की तरह थिरकने के कारण भी इस नृत्य को राई नृत्य कहा जाता है क्योंकि लोकनर्तकी बेड़िनी भी इसी तरह थिरकती है और अपने दर्शकों में उन्माद भर देती है। डॉ सत्या सोनी ने राईनृत्य और उसकी उत्पत्ति विषयक कथाओं पर अपने विचार रखे।कार्यक्रम का समन्वय डॉ बलवीर श्रीवास्तव द्वारा किया गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में राई लोकनृत्य की हुई प्रस्तुति
इस अवसर पर सागर,मध्यप्रदेश से आमंत्रित संतोष पाण्डेय ने बेड़िया समुदाय द्वारा किये जाने वाले राई लोक नृत्य के विविध सांस्कृतिक पक्ष को अवगत कराते हुए नृत्य की प्रस्तुति दी।

 

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