उत्तर प्रदेश का गौरव: चित्रकार आनन्द नारायण को राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा

Lucknow Focus News Desk: उत्तर प्रदेश के लिए यह बड़े हर्ष का विषय है कि बाराबंकी जिले के हरख कस्बे के निवासी और लखनऊ कला महाविद्यालय के पूर्व छात्र, प्रतिष्ठित चित्रकार आनन्द नारायण को हाल ही में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है।
सोमवार को नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में आयोजित 64वें राष्ट्रीय ललित कला अकादमी पुरस्कार समारोह में, महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें उनकी अद्वितीय पेंटिंग “कण-कण में हैं राम” के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया। यह सम्मान भारतीय कला जगत में आनन्द नारायण के योगदान की पुष्टि करता है।
पुरस्कृत कृति का आध्यात्मिक महत्व
आनन्द नारायण की पुरस्कृत कृति “कण-कण में हैं राम” आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पेंटिंग में अयोध्या नगरी के प्रमुख स्थल जैसे सरयू जी, सीता रसोई, कनक भवन, हनुमानगढ़ी और राम मंदिर की संस्कृति और सभ्यता का समावेश है।
आनन्द की दृष्टि में राम केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि आदर्श, दिव्यता और हर व्यक्ति के जीवन में विद्यमान चेतना हैं। पेंटिंग यह संदेश देती है कि राम सर्वत्र हैं, हर कण-कण में समाहित हैं।
इस कृति की शुरुआत उन्होंने जनवरी 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान अपनी कविता की पंक्तियों से की थी: “जिससे हो हर रोज़ दिवाली, ऐसा दिया दिला दो राम।”
आनन्द नारायण की कला और तकनीक
आनन्द नारायण की कला दर्शन, संस्कृति और आध्यात्म का सजीव अनुभव प्रस्तुत करती है। उनकी कृतियों में प्रकृति, मानवीय संवेदनाएँ, ग्रामीण जीवन और भारतीय सांस्कृतिक धरोहरें गहराई से उतरती हैं।
उनकी चित्रों की श्रृंखला “अनछुई प्रकृति” भारतीय ग्रामीण दृश्यों, विस्तृत मैदानों और पवित्र बनारस (वाराणसी) के घाटों को अमूर्त होते हुए भी यथार्थ के करीब चित्रित करती है।
उनकी कला की खास पहचान स्पैचुला तकनीक है। स्पैचुला का यह उपयोग उनकी पेंटिंग्स को त्रि-आयामी दृश्यात्मकता और तकनीकी स्थायित्व प्रदान करता है।
उनकी पेंटिंग्स अमूर्त होते हुए भी वास्तविकता के समीप, सरल होते हुए भी बहुपरत अर्थ लिए हुए होती हैं, जो दर्शक को केवल देखने नहीं, बल्कि उस वातावरण को महसूस करने और अनुभव करने का अवसर देती हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि और सम्मान
बाराबंकी, हरख के निवासी आनन्द नारायण ने 1987 में लखनऊ कला महाविद्यालय से बीएफए और 1989 में जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से एमएफए पूरा किया। 1982 से सक्रिय उनकी कृतियां भारत और विदेशों में निजी और संस्थागत संग्रहों में शामिल हैं।
इस समारोह में संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत सहित कला जगत के प्रमुख हस्ताक्षर मौजूद रहे। राष्ट्रीय प्रदर्शनी में 5922 आवेदकों की कृतियों में से आनन्द की पेंटिंग को सर्वश्रेष्ठ 283 कृतियों में विशेष स्थान मिला।




