यूपी में बिजली विभाग का निजीकरण? वर्टिकल सिस्टम के नाम पर हजारों पद खत्म करने का आरोप

Lucknow Focus News Desk: उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था के निजीकरण की आशंकाओं के बीच, विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने पावर कॉर्पोरेशन के शीर्ष प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। समिति का कहना है कि प्रबंधन ‘वर्टिकल सिस्टम’ के नाम पर हजारों पदों को खत्म करके बिजली व्यवस्था को पटरी से उतारने की साजिश कर रहा है।
लखनऊ में 8,000 से ज्यादा पद खत्म करने का आरोप
संघर्ष समिति के अनुसार, अकेले लखनऊ में ही (लेसा-L.E.S.A.) 8,000 से अधिक पद खत्म करने का फैसला लिया गया है। इससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा है, और उनका मानना है कि इसका सीधा असर उपभोक्ताओं को मिलने वाली सेवाओं पर पड़ेगा। समिति ने मुख्यमंत्री से इस मामले में तुरंत दखल देने की अपील की है।
- लेसा में जिन पदों को खत्म करने का फैसला लिया गया है, उनमें नियमित और संविदा दोनों तरह के कर्मचारी शामिल हैं।
- अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता, अवर अभियंता और टीजी-2 के कुल 2,055 पदों को कम किया जा रहा है।
- करीब 6,000 संविदा कर्मियों के पद भी मनमाने ढंग से खत्म किए जा रहे हैं।
- इसके अलावा, लेखा संवर्ग और कार्यकारी सहायक (एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट) जैसे प्रशासनिक पदों को भी कम किया जा रहा है।
निजीकरण की आशंका और कर्मचारियों का प्रदर्शन
कर्मचारियों का कहना है कि जिस तरह मध्यांचल, लेसा, केस्को और पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगमों में पद खत्म किए जा रहे हैं, उससे उनकी निजीकरण की आशंका और मजबूत हो गई है। कर्मचारियों ने कहा कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल में यह सिर्फ एक शुरुआत है।इस फैसले के विरोध में, बिजली कर्मचारियों ने पूरे प्रदेश के जिलों में जोरदार प्रदर्शन कर अपना गुस्सा जाहिर किया है।




