इच्छाशक्ति से प्रियंका ने लिखी विकास की नई कहानी

श्वेता त्रिपाठी
गंदे और बदबूदार पानी से भरे गड्ढे युक्त ऊबड़ ग खाबड़ कच्चे रास्ते या खडंजा। उधड़े बदन खेतों में काम करते किसान और सिर पर अनाज या घास का बोझ लादे महिलाएं। जगह-जगह लगे गोबर और गन्दगी के घूर। गांव, शब्द आते ही आपके दिमाग यही दृश्य अमूमन आता होगा। वर्ष 2019 में शादी के बाद पहली बार राजपुर आईं प्रियंका तिवारी का सामना भी ऐसे ही दृश्यों से हुआ ।
हाथरस की राजपुर ग्रामसभा प्रियंका की ससुराल है। राजस्थान में एक सैन्य परिवार में 24 फरवरी, 1992 में जन्मी और दिल्ली से पत्रकारिता में परास्नातक प्रियंका के लिए गांव का ऐसा दृश्य नया तो था ही, अजीब भी था। किस्से कहानियों से बिल्कुल अलग।
गाड़ी में बैठे-बैठे ही प्रश्न उछाला। इतनी गन्दगी ? पति से जवाब मिला, गांव है ! बात वहीं खत्म हो गई। प्रियंका, पति अलंकार के साथ अपनी ससुराल पहुंचीं। शाम को परिवार संग भोजन के समय प्रियंका ने फिर बात छेड़ दी। ससुर से बोलीं, पापा गांव में इतनी गन्दगी क्यों है। ससुर ने जवाब दिया, ग्राम प्रधान जानें। सब उन्हीं के जिम्मे है । पर वह करते क्यों नहीं हैं, इतनी गन्दगी उन्हे दिखती नहीं, प्रियंका ने प्रति प्रश्न किया।
ससुर ने मजाक-मजाक में कह दिया, एक काम करो तुम प्रधानी का इलेक्शन लड़ जाओ और प्रधान बनकर संवार दो गांव ! प्रियंका कहती हैं, मेरे ससुर की मजाक में कही गई यह बात, मेरे लिए आशीर्वाद बन गई और अगले ही वर्ष पंचायत के इलेक्शन में मैंने पर्चा भर दिया। भारी मतों से जीती।
वर्ष 2021 में प्रियंका ने ग्राम प्रधान का पदभार ग्रहण किया और प्रधान बनते ही सबसे पहले गांव को गंदगी मुक्त करने का संकल्प लिया और गांव में प्लास्टिक बैन कर दिया। शुरुआत में इसका थोड़ा विरोध भी हुआ लेकिन प्रियंका ने हार नहीं मानी। लोगों को घर-घर जाकर समझाया। प्लास्टिक के नुकसान बताए। बच्चों को जागरूक किया। दुकानदारों और लोगों को कपड़े के थैले बांटे।
प्लास्टिक बैन के उल्लंघन पर जुर्माना
प्रियंका बताती हैं कि जब समझाने के बाद भी लोगों, खासकर दुकानदारों पर कोई असर नहीं हुआ तो योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कड़ाई की। नियम बनाए। प्लास्टिक का उपयोग करने वालों पर जुर्माना लगाया। खासतौर से दुकानदारों पर। नियम यह बनाया गया कि जिस भी दुकानदार के पास प्लास्टिक पॉलिथिन मिली, उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। इसकी तीन कैटेगरी बनीं। पहली बार प्लास्टिक पॉलिथिन मिलने पर 500 रुपये, दूसरी बार उल्लंघन पर 1000 रुपये और अगर तीसरी बार भी उल्लंघन हुआ तो संबंधित दुकान का लाइसेंस रद करवाया जायेगा। इसका बहुत ज्यादा असर हुआ और लोगों ने मेरी बात समझी। लोगों और दुकानदारों ने साथ दिया और कारवां आगे बढ़ा। यह मेरी पहली सफलता थी, मुस्कराते हुए प्रियंका ने कहा । बोलीं, अब ग्रामसभा में काफी हद तक प्लास्टिक का उपयोग कम हो गया। लेकिन, सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि पहले से गंदगी और जो प्लास्टिक अभी भी यूज हो रही थी, उसका निपटारा कैसे हो?
प्लास्टिक बैंक की स्थापना
स्वस्थ रहने के लिए स्वच्छता बहुत जरूरी है। इसी ध्येयवाक्य को चरितार्थ करने के लिए प्रियंका बीडीओ से मिलीं और उनके सहयोग से गांव में प्लास्टिक बैंक की स्थापना करवाई । प्लास्टिक बैंक यानी कूड़ा कलेक्शन सेंटर। गांवों के लोग अपने यहां से निकलने वाला प्लास्टिक यहीं आकर जमा करने लगे। लोगों का उत्साह बना रहे, इसके लिए प्रियंका ने एक लुभावनी स्कीम भी चलाई। एक किलो प्लास्टिक कूड़ा कलेक्शन सेंटर पर जमा करने पर जमाकर्ता को दो रूपये मिलते। बाद में प्रियंका की इस स्वच्छता मुहिम का आसपास की अन्य ग्राम पंचायतों ने भी अनुसरण किया। यही नहीं प्रियंका से प्रेरित होकर यूपी सरकार ने प्रखंड स्तर पर प्लास्टिक कलेक्शन सेंटर शुरू किया। बाद में बीडीओ और सरकार के सहयोग से ग्रामसभा में ही जीरो वेस्ट मैनेजमेंट मशीन लगाई गई। इस मशीन में प्लास्टिक और अन्य इसी तरह के कूड़े से सड़क निर्माण के लिए मैटेरियल बनाया जाता है। राजपुर प्रदेश में शायद पहली ऐसी ग्रामसभा है, जिसमे इस तरह लोगों के घरों से निकलने वाले प्लास्टिक और कूड़े का उपयोग किया जाता है।
सीसीटीवी से लैस ग्रामसभा
स्वच्छता पर लोगों और सरकार के सहयोग से उत्साहित प्रियंका ने ग्रामसभा में दूसरा बड़ा काम यह किया कि पूरी ग्रामसभा को सीसीटीवी कैमरों से लैस किया गया। शुरुआत में प्रतिद्वंदियों द्वारा इसका काफी विरोध हुआ। लेकिन, एक घटना ने सभी के मुंह बंद कर दिए। हुआ ये था कि ग्रामसभा में कुछ अराजकतत्वों ने एक व्यक्ति को गोली मार दी और भाग गए। बाद में गांव में लगाए गए कैमरों की वजह से ही हत्यारोपी पकड़े गए । प्रियंका कहती हैं कि दो संकल्पों को पूरा करने के बाद मुझ पर जुनून छा गया मुझ पर कि मेरी ग्रामसभा मानक बने ।
बहुउद्देशीय अंत्येष्टि स्थल का निर्माण
स्वच्छता और सुरक्षा पर अभूतपूर्व कार्य के बाद प्रियंका का ध्यान गांव की एक बड़ी समस्या पर गया। समस्या यह थी कि ग्रामसभा में एक भी अंत्येष्ठि स्थल नहीं था। बरसात के दिनों में यहां बहुत परेशानी होती थी। कहती हैं कि मेरी ग्रामसभा में ज्यादातर लोग बहुत लो इनकम वाले हैं। बतौर प्रियंका, आप मजदूर वर्ग कह सकते हैं। किसी के पास खेत पात हैं तो किसी के पास नहीं हैं। बरसात के दिनों में अगर किसी के यहां निधन हो जाता तो घंटों लाश ऐसे ही रखी रहती। जब मुझे यह समस्या दिखी तो मैंने ग्रामसभा में एक बहुउद्देशीय अंत्येष्ठि स्थल का निर्माण कराया । मेरी ग्रामसभा का कार्य देखने प्रदेश के कई आला अफसर आ चुके हैं, जिनमें मुख्य सचिव मनोज कुमार भी शामिल हैं। हालांकि, प्रियंका को मलाल अभी इस बात का है कि ग्रामीणों के रोजगार के लिए अभी तक कुछ स्थाई इंतजाम ग्रामसभा में नहीं हो पाया है। लेकिन, प्रयास जारी है।
ग्राम पंचायत में कराए गए काम
- बहुउद्देशीय पंचायत भवन का निर्माण
- लाइब्रेरी
- आर आर सी सेंटर
- फ्री वाइ-फ़ाई
- सभी सड़कों का निर्माण
- सिंचाई नाले के पुल का निर्माण
- इंटरैक्टिव डिजिटल पैनल क्लासरूम
- आंगनवाड़ी केंद्र का निर्माण
- बाल सभा एवं महिला सभा
- लाइट एवं सोलर लाइट से लैस।
मिले यह पुरस्कार
- दो बार मुख्यमंत्री से पुरस्कृत (2021-2022, 2022-2023)
- ओड़िसा, भोपाल, भुवनेश्वर, लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया
- 2022 में राज्य स्तर पर यशस्वी प्रधान पुरस्कार द्वारा पुरस्कृत
- FICCI-ISCद्वारा women changemaker in sanitation 2023 अवार्ड
- भारतीय छात्र संसद में उच्च शिक्षित सरपंच अवार्ड
- दिल्ली में नेशनल वाश कांक्लेव में प्रतिनिधित्व किया
- यूपी सरकार द्वारा आयोजित कई प्रशिक्षणों में भागीदारी
- पंचायतीराज, यूनिसेफ़, फ़िक्की के कई आयोजनों में भागीदारी
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