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राहुल गांधी का इंतजार कर रही है एक नई राजनीतिक मुसीबत

लखनऊ फोकस ब्यूरो

नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के गले में एक नई मुसीबत पड़ती हुई दिख रही है। इस मुसीबत से पार पाना पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष के लिए आसान नहीं होगा। इस मुसीबत को आमंत्रित करने वाले उनके अपने खास लोग ही हैं।

इस समय केरल के वायनाड के पूर्व सांसद राहुल गांधी संसद सदस्यता के लिए अयोग्य घोषित होने और चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध के चलते चर्चा में हैं। राहुल ने सार्वजनिक तौर पर कहा है कि वह इस मामले में माफी नहीं मांगेंगे। कहा तो यहां तक जा रहा है कि राहुल ने कोर्ट में इसलिए माफी नहीं मांगी ताकि सजा पाकर वह शहीद की मुद्रा में आएं और इसका राजनीतिक लाभ ले सकें।

अब इसी सांसदी के मुद्दे से जुड़ी एक नई मुसीबत राहुल का इंतजार करती हुई दिखाई पड़ रही है। आज की तारीख में यह सवाल राजनीतिक हलकों में घूम रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि राहुल गांधी की सांसदी खत्म होने के मसले पर जर्मनी का हस्तक्षेप कितना उचित है?

दरअसल, बृहस्पतिवार को यह मसला तब सामने आया जब इस मामले में जर्मनी के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के एक बयान पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने जर्मनी का आभार जताया। इस पर कानून मंत्री किरेन रिजीजू ने दिग्विजय सिंह के ट्वीट का स्क्रीनशाट शेयर करते हुए कहा-भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के लिए विदेशी शक्तियों को आमंत्रित करने के खातिर राहुल गांधी का आभार।

जर्मनी के विदेश मंत्रालय ने टिप्पणी की थी-राहुल गांधी फैसले को चुनौती दे सकते हैं। तब यह स्पष्ट होगा कि क्या यह फैसला टिक पाएगा? और क्या निलंबन का कोई आधार है?

कूटनीतिक और राजनीतिक तौर पर देखा जाए तो यह जर्मनी का भारत के आंतरिक मामलों में सरासर हस्तक्षेप है। इस पर आभार जताकर दिग्विजय सिंह ने मसले को बेवजह और हवा दे दी है। अब भाजपा इस मुद्दे को जोर-शोर से जनता के बीच ले जाने का प्लान बना रही है ताकि राहुल को नीचा दिखाया जा सके। राहुल इस मामले में कोई जवाब दे भी नहीं पाएंगे क्योंकि सचमुच यह जर्मनी का भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप है। मोदी और राहुल की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता हो सकती है लेकिन भारत के बाहर दोनों नेता पहले भारतीय हैं फिर कुछ और। ऐसे में यह मामला ऐसा है कि यदि राहुल के गले पड़ गया तो वह भारी मुसीबत में फंस जाएंगे।

 

 

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