छात्रवृत्ति घोटाला: समाज कल्याण विभाग के 20 अधिकारियों पर शिकंजा, EOW ने तलब किया ब्योरा

Lucknow Focus News Desk: बहुचर्चित छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति घोटाले में अब जांच का दायरा और तेज हो गया है। आर्थिक अपराध शाखा (Economic Offences Wing – EOW) की जांच की आंच अब समाज कल्याण विभाग के 20 तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों तक पहुंच चुकी है। जांच एजेंसी ने इन सभी के नाम, पदनाम और कार्यकाल से जुड़ी विस्तृत जानकारी मांगी है।
27 करोड़ का घोटाला, 71 संस्थान आरोपी
यह मामला मथुरा जिले का है, जहां वर्ष 2015-16 से 2019-20 के बीच 71 निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) पर छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की भारी-भरकम रकम हड़पने का आरोप है। जांच में सामने आया है कि इन संस्थानों ने समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से लगभग ₹27 करोड़ की रकम का फर्जीवाड़ा किया।
इस घोटाले में फर्जी छात्रों के नाम पर सरकारी सहायता ली गई, और धनराशि उन छात्रों तक कभी पहुंची ही नहीं। कुछ मामलों में ऐसे छात्रों के नाम भी सामने आए हैं जो संस्थान में नामांकित ही नहीं थे।
EOW ने बढ़ाई जांच की रफ्तार
मुख्यमंत्री कार्यालय से मंजूरी मिलने के बाद इस घोटाले की जांच ईओडब्ल्यू की कानपुर इकाई को सौंपी गई थी। अब ईओडब्ल्यू ने समाज कल्याण विभाग को पत्र भेजकर उन 20 अधिकारियों और कर्मचारियों के विवरण की मांग की है, जो उस दौरान मथुरा में तैनात थे और जिन पर मिलीभगत का संदेह है।
ईओडब्ल्यू की इस कार्रवाई से संबंधित अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, क्योंकि विभाग से मिलने वाले ब्योरे के आधार पर पूछताछ और कानूनी प्रक्रिया की अगली कड़ी शुरू की जाएगी।
शासन की सख्ती, जल्द हो सकती हैं गिरफ्तारियां
शासन स्तर पर इस घोटाले को लेकर कड़ा रुख अपनाया गया है। सूत्रों के अनुसार, जिन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई जाएगी, उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। साथ ही संस्थानों के संचालकों पर भी कार्रवाई तय मानी जा रही है।
नज़र में रखें ये मुख्य बिंदु:
- जांच अवधि: 2015-16 से 2019-20
- घोटाले की राशि: लगभग ₹27 करोड़
- आरोपी संस्थान: 71 निजी आईटीआई
- संदिग्ध अधिकारी/कर्मचारी: समाज कल्याण विभाग के 20
जांच एजेंसी: आर्थिक अपराध शाखा (EOW), कानपुर इकाई
निष्कर्ष: छात्रवृत्ति जैसे संवेदनशील और ज़रूरतमंद छात्रों के लिए बने फंड का दुरुपयोग बेहद गंभीर अपराध है। शासन की सक्रियता और ईओडब्ल्यू की तेज़ जांच से इस मामले में जल्द बड़ी कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।




