बॉन्ड मार्केट के लिए सेबी का नया प्रस्ताव, ‘क्रेडिट रिस्क-ओ-मीटर’ से रंगों के जरिए पता चलेगा निवेश का जोखिम

Lucknow Focus News Desk: पूंजी बाजार नियामक सेबी (SEBI) डेट सिक्योरिटीज (बॉन्ड/ऋण प्रतिभूतियों) में निवेश करने वाले आम निवेशकों के लिए एक सरल और पारदर्शी व्यवस्था लाने जा रहा है। सेबी ने एक अनिवार्य ‘कवर-कोडेड क्रेडिट रिस्क-ओ-मीटर’ (Color-Coded Credit Risk-o-Meter) पेश करने का प्रस्ताव रखा है। ट्रैफिक सिग्नल की तर्ज पर काम करने वाला यह टूल जटिल क्रेडिट रेटिंग्स की उलझन को खत्म कर निवेशकों को यह समझने में मदद करेगा कि किसी कंपनी के बॉन्ड में पैसा लगाना कितना सुरक्षित या जोखिम भरा है।
6 कलर-कोडेड लेवल्स और उनका मतलब:
प्रस्तावित क्रेडिट रिस्क-ओ-मीटर में जोखिम के स्तर को 6 अलग-अलग रंगों से दर्शाया जाएगा:
| रंग (Color Code) | जोखिम का स्तर (Risk Level) |
| आयरिश ग्रीन (Irish Green) | सबसे कम क्रेडिट जोखिम |
| हल्का पीला-हरा (Light Yellow-Green) | बहुत कम जोखिम |
| नियॉन येलो (Neon Yellow) | कम जोखिम |
| कारमेल (Caramel) | मध्यम जोखिम |
| डार्क ऑरेंज (Dark Orange) | उच्च मध्यम जोखिम |
| लाल (Red) | डिफॉल्ट / बहुत उच्च जोखिम |
मोबाइल ऐप्स और विज्ञापनों पर दिखाना होगा अनिवार्य
सेबी के नियमों के अनुसार बॉन्ड जारी करने वाली कंपनियों और ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म्स के लिए इस ‘रिस्क-ओ-मीटर’ को ऑफर डॉक्यूमेंट, विज्ञापनों, मोबाइल ऐप्स और वेबसाइट्स पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा।
सख्त चेतावनी और नियम
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सबसे खराब रेटिंग का रंग दिखेगा: यदि किसी बॉन्ड को अलग-अलग रेटिंग एजेंसियों द्वारा अलग रेटिंग मिली है, तो मीटर में सबसे अधिक जोखिम (सब्सपे कम rating) दर्शाने वाले रंग को ही चुना जाएगा।
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असुरक्षित बॉन्ड पर बोल्ड लाल चेतावनी: यदि बॉन्ड पूरी तरह असुरक्षित (Unsecured) है, तो मोटे बोल्ड लाल अक्षरों में चेतावनी दर्ज करनी होगी।
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वित्तीय स्थिति बदलने पर तुरंत बदलेगा रंग: यदि भविष्य में कंपनी की वित्तीय स्थिति बिगड़ती है, तो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को रियल-टाइम में मीटर का रंग बदलना अनिवार्य होगा।




