रीढ़ की हड्डी का दर्द बना आम समस्या, विशेषज्ञों ने बताए कारण और बचाव के उपाय


Lucknow Focus News Desk: बदलती जीवनशैली और तकनीक पर बढ़ती निर्भरता के कारण रीढ़ की हड्डी और उसके आसपास दर्द की समस्या तेजी से आम होती जा रही है। चाहे वह गर्दन के पास हो या कमर के निचले हिस्से में यह दर्द अब सिर्फ उम्रदराज लोगों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि युवा वर्ग भी इसकी चपेट में आता जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, दिनभर कंप्यूटर और मोबाइल पर काम करना, लंबे समय तक झुककर बैठना या गलत मुद्रा में लेटना, और भारी सामान उठाना इस दर्द के प्रमुख कारण बन रहे हैं। एक प्रसिद्ध अस्पताल के ऑर्थोपैडिक विभाग के यूनिट हेड बताते हैं कि रीढ़ की हड्डी में दर्द कई कारणों से हो सकता है। सामान्य कारणों में शामिल हैं:
- लंबे समय तक गलत मुद्रा में बैठना या लेटना
- गर्दन झुकाकर मोबाइल या लैपटॉप का अत्यधिक उपयोग
- भारी वजन उठाना
- अचानक झटका लगना या मांसपेशियों में खिंचाव
- बढ़ती उम्र में हड्डियों का घिसना (डिजेनेरेटिव चेंजेस)
इसके अलावा, स्लिप डिस्क, सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, हर्नियेटेड डिस्क, ऑस्टियोपोरोसिस, गठिया (आर्थराइटिस) और स्पाइनल स्टेनोसिस जैसे चिकित्सकीय कारण भी रीढ़ में दर्द का कारण बन सकते हैं। कभी-कभी संक्रमण या गंभीर चोट भी इस तरह की समस्याओं को जन्म दे सकते हैं।
दर्द की पहचान और रोकथाम जरूरी
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि रीढ़ या उसके आसपास किसी भी हिस्से में लगातार या तीव्र दर्द हो रहा है, तो यह जरूरी है कि पहले दर्द का स्थान और प्रकार पहचाना जाए। उदाहरणस्वरूप:
- कमर के निचले हिस्से में दर्द स्लिप डिस्क की ओर संकेत कर सकता है।
- ऊपरी हिस्से में दर्द या गर्दन में अकड़न सर्वाइकल की संभावना को दर्शा सकता है।
उपचार और सावधानियां
- बैठने और उठने की सही मुद्रा अपनाना
- कार्य के बीच में छोटे-छोटे ब्रेक लेना और स्ट्रेचिंग करना
- मोबाइल या लैपटॉप का उपयोग करते समय आंख और स्क्रीन के बीच उचित दूरी बनाए रखना
- किसी भी प्रकार का भारी वजन उठाते समय सावधानी बरतना
- जरूरत पड़ने पर फिजियोथेरेपी या चिकित्सकीय सलाह लेना
कुछ हल्के मामलों में तेल की मालिश, गर्म सिकाई, और हल्के व्यायाम से भी राहत मिल सकती है। लेकिन यदि दर्द लगातार बना हुआ है या असहनीय हो रहा है, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए। रीढ़ की हड्डी का दर्द एक आम लेकिन नजरअंदाज की जाने वाली समस्या बनता जा रहा है। समय रहते सही इलाज और जीवनशैली में बदलाव इस परेशानी से बचा सकते हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि सावधानी ही सबसे अच्छा उपाय है।
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