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वैचारिक दारिद्रय से संक्रमित तेजस्वी यादव की निन्दनीय बेहयाई!

Lucknow Focus News Desk: देश के राजनीतिक  रूप से संवेदनशील  सूबे बिहार में आने वाले कुछ महिनों बाद आसन्न  विधान  सभा चुनाव से समूचा परिदृश्य  गरमाया  हुवा परिलक्षित  है। चुनाव  से पूर्व   राज्य की मतदाता सूची के त्वरित संशोधन  की सुनिश्चित  एक माह की समयबद्ध  प्रक्रिया  शिद्दत  के साथ चरम पर  है। चुनाव  आयोग की मानें तो अब तक दो तिहाई  कसरत पूरी  की जा चुकी है, और अवशेष कार्यवाही 25 जुलाई  तक पूरी कर ली जाएगी! सवा लाख बी एल ओ के सहायता और  विभिन्न  राजनीतिक  दलों के वालियन्टियर्स  की सहभागिता लेकर हर जिले के कलेक्टर  की देखरेख  में यह अभियान  जारी है। देश के अनेक राज्यों  यथा असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड की तर्ज  पर बिहार  में भी खासकर सीमांचल  के अन्तर्गत  आने वाले चार जिलों में चिन्ताजनक  रूप से बदल गई  डेमोग्राफी! और इन जिलों में बिहार के अन्य सभी जनपदों में बनाए गए  आधारकार्ड  के 94 फीसदी आंकड़ों की तुलना में आधारकार्ड  की संख्या आबादी के सापेक्ष 121 से 126 प्रतिशत  होने की खतरे की घंटी को समय समय पर हाईकोर्ट और  सुप्रीम कोर्ट  सहित बिहार  के सत्तारूढ़ एन डी ए गठबंधन  के नेताओं ने चेताया है। भारत निर्वाचन आयोग  ने अपने संवैधानिक प्रावधानों के दायित्वबोध  को अनुभव कर बीते दिनों मतदाता सूचियों में कथित तौर पर  बोगस मतदाताओं खासकर  रोहिंग्या व बांग्लादेशी घुसपैठियों के शामिल होने के अंदेशे की जमीनी सच्चाई  सामने लाने के लिये मतदाता सूची के शुद्धिकरण  का निर्णय लेकर मिशन मूड में इस महत्वपूर्ण  काम का बीड़ा उठाया! उल्लेखनीय  है कि बिहार  में यह शुद्धिकरण  अतीत में वर्ष 2003 में होने के बाद से अद्यतन  नहीं हो पाया था!

बस बिहार  ही नहीं वरन देशभर  में बैठैबिठाए  इंडी गठबंधन  के दलों के नेताओं को ऊलजलूल बयान देने, लोकतंत्र  की हत्या होने! बीजेपी को फायदा पहुंचाने तथा मुस्लिम और कमजोर तबके के लोगों का नाम काटने जैसा आधारहीन आरोप लगाकर  मिथ्यामंडन   का वितंडावाद  चलाने का मौका  मिल गया। हद तो यह  हो गई  कि चुनाव  आयोग की संवैधानिक अधिकार  सम्मत  इस सामान्य  कार्यवाही को रुकवाने के लिए  इंडी गठबंधन  के विभिन्न  दलों के नेताओं और चर्चित  वकीलों ने दर्जन भर  प्रिटीशन्स  सुप्रीम कोर्ट  के सम्मुख  दाखिल कर दीं। समूचा इकोसिस्टम  सुप्रीम कोर्ट  में सुनवाई  से एक दिन पहले बिहार  को बन्धक  बनाकर आगजनी, लूटपाट और  हिंसात्मक  आन्दोलन पर उतारू हो गया।दोनों खानदानी वारिस  यानि राहुल और तेजस्वी की गलबहियां  नजर आयीं।  अगले दिन सुप्रीम कोर्ट  में तीन घंटे चली लंबी सुनवाई  के बाद भी जब न्यायालय  ने स्टे देने से इंकार  करते हुवे चुनाव आयोग  की कारवाई  को संवैधानिक  अधिकार  मानते हुवे अगली सुनवाई  तिथि पर वस्तुस्थितिपरक  रिपोर्ट प्रस्तुत  करने को कह दिया तो समूचे इंडी गैंग और  कपिल सिब्बल  सरीखों को जैसे सांप सूंघ गया! सुप्रीम कोर्ट  के आदेश का समादर करने की वजाॅय  अगले ही दिन देश के नेता प्रतिपक्ष राहुल  गांधी  ने अपने सुपरिचित  टोन ! में चुनाव आयोग को बीजेपी की टीम बताने और बिहार में वोटों की चोरी कर लेने की तैयारी का नाम देकर अपनी भंड़ास  निकाली! दो  दिन बाद ही भावी सी एम बनने को उतावले लालू प्रसाद यादव  के सुपुत्र  तेजस्वी यादव ने पटना में प्रिंट और इलेक्ट्रानिक  मीडियाजगत  के पत्रकारों  के समक्ष  लाइव! रूप से भारत निर्वाचन आयोग  के लिए  न सिर्फ  घृणित और  अमर्यादित  व नितांत शर्मनाक गाली-गलौज   की श्रेणी से आच्छादित  गलीच भाषा का इस्तेमाल  कर बिहार के राजनीतिक  परिदृश्य  को तार-तार कर दिया। अपने स्वनामधन्य  पिता लालू की तर्ज  पर आए दिन मसखरी  युक्त बयानबाजी, सतही व स्तरहीन  भाषा शैली और असंसदीय कटाक्ष तथा उजड्डयी! वाली भाव भंगिमा के चलते तेजस्वी परिलक्षित  होते आए  हैं।  अपनी इस तथाकथित  भोंडी! और शार्ट कट स्टाइल को आत्मसात  कर तेजस्वी को यह स्मरण नहीं रहा है कि वो अपने को राजनीतिक  रूप से समृद्ध  उस बिहार  के भावी मुख्य  मंत्री  का न सिर्फ  दावेदार  मान रहे हैं अपितु अपने को सी एम बनने का दावा भी ठोक चुके हैं! राजनीति में शालीनता, मर्यादा, गरिमा और दायित्वबोध  से परिपूर्ण  शुचिता को तिलांजलि देने में जहां सभी दलों के नेताओं ने पराकाष्ठा पार  कर दी है वहीं तेजस्वी यादव ने तो कदाचित  जानबूझकर  अपने आपत्तिजनक व  अमर्यादित व शर्मनाक शब्दोच्चार को बाकायदा दुहरा कर यह सिद्ध  भी कर दिया कि जुबान फिसलने या गलती से ऐसा बयान न देकर समूचे होशोहवास  में यह गलीच वक्तव्य दे रहे हैं। पूरा बिहार शर्मनाक  हरकत पर अफसोस  करता होगा। नैतिकता की सीमा को तार तार  करने में बीते दिनों इन्हीं तेजस्वी  यादव के अग्रज  भ्राता  तेज प्रताप  यादव का नैतिकता की धज्जियाँ  उड़ाता अश्लील वीडियो बिहार  ही नहीं वरन देश भर  में पूरे लालू खानदान  की थू-थू कराता दृष्टिगत हुआ  था! तब लीपा पोती कर लालू ने नौटंकीबाजी का दांव खेलते हुवे कथित रूप  से तेज प्रताप  को परिवार से बेदखली का फर्मान  जारी किया था ! अब छोटे बेटे के जिसे भावी सी एम  प्रोजेक्ट  कर ढोल नगाड़ा  पीटा जा रहा  है के द्वार  वैचारिक दारिद्रय  से ग्रसित  होकर मानसिक दिवालियापन  का नमूना पेश  करने वाले घृणित बयान के लिए लालू अपनी नैतिक जिम्मेदारी का निर्वाहन कर कोई  चेतावनी या सीख देने की कोशिश  करेंगे अथवा अपनी  पूर्ववर्ती  स्टाइल  को शिद्दत  के साथ अनुकरण करने के लिए  तेजस्वी की पीठ ठोंकेंगे?  वैसे दुर्भाग्यपूर्ण  वस्तुस्थिति तो यह है कि शैक्षणिक  योग्यता भारतीय राजनीतिक परिदृश्य  में गौण ही नहीं अपितु अप्रासंगिक  बिन्दु मानी जाती रही है! अंगूठा टेक और प्राइमरी स्कूल  तक गये अनेक स्वनामधन्य भारतीय राजनीतिक  लोकतंत्रात्मक सिस्टम  को ठेंगा दिखाते रहे हैं! नौंवी पास बताए जाने वाले आज के  दौर के युवा नेता से यह आश कर ली गई  थी कि चलो मैट्रिक पास  नहीं तो क्या राजनीतिक  कोचिंग  में तो प्रवीणता  हासिल कर  ही ली है, पर ऐन चुनाव से पहले तेजस्वी ने  न सिर्फ  बिहार  को शर्मिंदा  किया है वरन अपने वैचारिक पतन! और राजनीतिक  अपरिपक्वता की असलियत  भी खुद ब खुद  सामने लाकर रख दी है। अफसोसजनक  तो यह है कि भाजपा व जे डी यू तथा चिराग पासवान की पार्टी के अलावा न तो राजद  न ही कांग्रेस और  न ही इन्डी गठबंधन  के नेता ने तेजस्वी के अफसोसजनक  बयान की भर्त्सना  तो दूर सामान्य  आलोचना तक नहीं की है!

ये लेखक के निजी विचार हैं।

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