लखनऊ

BBAU में हिंदी पखवाड़ा उत्सव 2025 का भव्य समापन, वक्ताओं ने हिंदी को बताया ‘सांस्कृतिक चेतना की आत्मा’

Lucknow Focus News Desk: बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (BBAU), लखनऊ के हिंदी प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित हिंदी पखवाड़ा उत्सव 2025 का समापन और पुरस्कार वितरण समारोह आज पृथ्वी एवं पर्यावरण विज्ञान विद्यापीठ सभागार में संपन्न हुआ। इस अवसर पर ‘भारत की सांस्कृतिक धरोहर: हिंदी’ विषय पर एक महत्वपूर्ण विमर्श भी आयोजित किया गया।

‘हिंदी को जनभाषा से जगभाषा बनाना है’

समारोह की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अश्विनी कुमार सिंह ने इस मौके पर सभी को संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “आइए संकल्प लें कि हम अपनी राजभाषा हिंदी को सदैव जीवित और समृद्ध बनाएं।”

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. रघुराज सिंह (अध्यक्ष/राज्यमंत्री, श्रम एवं सेवायोजन, उत्तर प्रदेश सरकार) ने अपने संबोधन में हिंदी के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय एकता की आत्मा है। डॉ. सिंह ने युवाओं से अपील की कि हिंदी को जनभाषा से जगभाषा बनाने के लिए उनकी सक्रिय भूमिका आवश्यक है।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, प्रोफेसर सूर्य प्रसाद दीक्षित (सभापति, हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग) ने हिंदी की गौरवशाली परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी विश्व को जोड़ने वाली भाषा है और आज यह प्रोद्योगिकी की भाषा भी बन रही है।

विजेताओं को मिला पुरस्कार, उत्साहपूर्ण रही भागीदारी

स्वागत वक्तव्य देते हुए डॉ. बलजीत कुमार श्रीवास्तव (सहायक निदेशक राजभाषा) ने बताया कि यह हिंदी पखवाड़ा केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह हमें मातृभाषा के महत्व को आत्मसात करने का अवसर देता है। उन्होंने 15 दिनों तक चले इस उत्सव की पूरी रूप-रेखा प्रस्तुत की और सभी शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों का उत्साहपूर्ण भागीदारी के लिए आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं (कविता, निबंध, टंकण, सुलेख) के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. लता बाजपेई ने किया। उन्होंने कहा कि हिंदी की प्रासंगिकता केवल अकादमिक दायरे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और जीवन-मूल्यों की संवाहक भी है। समापन समारोह में विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, अधिकारी और छात्र-छात्राओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही, जिसने इस उत्सव को स्मरणीय बना दिया।

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