21 जुलाई से शुरू होगा संसद का मानसून सत्र, विपक्ष ने सर्वदलीय बैठक में उठाए कई अहम मुद्दे

Lucknow Focus News Desk: संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से शुरू होकर 21 अगस्त तक चलेगा। इस एक महीने के दौरान कुल 21 बैठकें निर्धारित की गई हैं। सत्र से पहले रविवार को आयोजित सर्वदलीय बैठक में विभिन्न दलों ने अपने-अपने मुद्दे उठाए और सरकार से स्पष्ट रुख की मांग की।
बैठक में भाग लेते हुए विपक्षी दलों ने पहलगाम आतंकी हमला, भारत-पाकिस्तान सीमा पर संघर्ष विराम और अमेरिकी राष्ट्रपति के हालिया दावों पर चर्चा की मांग की। इसके अलावा बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण और मणिपुर में कानून-व्यवस्था की स्थिति भी चर्चा का विषय बनी।
कांग्रेस की ओर से उठाए गए मुद्दे
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि पार्टी इस सत्र में सुरक्षा, विदेश नीति और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगेगी। उन्होंने कहा, “पहलगाम हमले पर उपराज्यपाल का बयान गंभीर है। सरकार को इस पर संसद में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा भारत को लेकर की गई टिप्पणी से देश की गरिमा और सेना के सम्मान पर सवाल खड़े हुए हैं। “इसका जवाब सिर्फ प्रधानमंत्री ही दे सकते हैं,” उन्होंने जोड़ा।
गोगोई ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और चुनाव आयोग के रवैये पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत हैं, और इन पर गंभीर बहस की जरूरत है।
चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं पर भी उन्होंने चर्चा की आवश्यकता जताई। उनका कहना था कि सीमाओं पर बढ़ते तनाव को देखते हुए संसद में रक्षा और विदेश नीति पर विस्तार से बात होनी चाहिए।
मणिपुर पर बोले गोगोई, “प्रधानमंत्री ने मणिपुर में जल्द शांति की बात कही थी, लेकिन ढाई साल बीतने के बाद भी हालात जस के तस हैं। उन्हें वहां की स्थिति पर खुद सदन को जानकारी देनी चाहिए।”
ओडिशा को लेकर बीजद की चिंता
बीजू जनता दल (बीजद) के सांसद सस्मित पात्रा ने ओडिशा में कानून-व्यवस्था की गिरती स्थिति को मुख्य मुद्दा बताया। उन्होंने राज्य में महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों में बढ़ोतरी, बालासोर और पुरी में हुई घटनाओं और सरकारी अधिकारियों पर हमलों का हवाला देते हुए भाजपा सरकार की आलोचना की।
बीजद ने संसद में ओडिशा को विशेष राज्य का दर्जा देने, महानदी और पोलावरम विवादों के समाधान, कोयला रॉयल्टी संशोधन, तटीय और राष्ट्रीय राजमार्ग विकास, रेलवे विस्तार, डिजिटल सेवाओं में सुधार, और आदिवासी कल्याण से जुड़े मुद्दे उठाने की बात कही। पात्रा ने कहा कि उनकी पार्टी विपक्षी दलों के साथ मिलकर इन विषयों पर सरकार से जवाब मांगेगी।




