देश में सांप्रदायिक उन्माद और सीमा पर तनाव बढ़ाएगा बीता सूर्यग्रहण


-जया सिंह, ज्योतिषाचार्य।
सूर्य ग्रहण एवं उनके प्रभाव—- 25 अक्टूबर 2022 16:17 दिन मंगलवार
कार्तिक अमावस्या तिथि, नक्षत्र-स्वाति, योग -प्रीति, करण-नाग, राशि- तुला, वर्ण-शूद्र, वग्रहण श्य-मानव, योनि -महेश, राशि- शुक्र, गण -देव , नाडी -अंत्य, राशि पाया लौह, नक्षत्र पाया-चांदी
चंद्र ग्रहण एवं उनके प्रभाव– 8 नवंबर 2022 16:32 दिल्ली दिन- मंगलवार , कृष्ण प्रतिपदा तिथि, नक्षत्र भरणी, योग – व्यतिपात, करण -बव, वर्ण- क्षत्रिय, वश्य- चतुष्पाद , योनि- गज, राशि- मंगल, गण -मनुष्य, राशि – मेष , नाडी- मध्य, तत्व अग्नि , राशि -पाया –स्वर्ण, नक्षत्र-पाया – स्वर्ण
25 अक्टूबर 2022 कार्तिक कृष्ण पक्ष अमावस्या को दिन मंगलवार को सूर्य ग्रहण पड़ रहा है i यह एक आकाशीय घटना है जो कि वर्ष में दो बार घटित होती है I इसके बाद ही 15 दिन के अंदर पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण होता है ।
जो कि इस बार 8 नवंबर 2022 को चंद्र ग्रहण हो रहा है ।
जैसा कि हम सब जानते हैं की ग्रहणो का विस्तृत प्रभाव जन -मानस ,देश -विदेश, व्यापार, कृषि ,स्वास्थ्य, राजाओं ,मंत्रियों एवं प्रकृति और प्राकृतिक उत्पादों पर पड़ता ही है । इन ग्रहण का प्रभाव 6 महीने से लेकर 12 वर्ष तक पड़ सकता है I
ग्रहणों का भारतीय ज्योतिष में मेदनी- शास्त्र में अत्यधिक महत्वपूर्ण स्थान है, इसके द्वारा अनंत काल से भारतीय ज्योतिष में विद्वान और ऋषि मुनि भविष्य की संभावनाओं को देखा करते थे, ग्रहणों का उल्लेख प्राचीन-शास्त्रों में भी पाया जाता है।
इस बार का सूर्य ग्रहण तुला राशि में दीपावली के दिन पड़ रहा है – निश्चित तौर पर विश्व में धनवान पूंजीपतियों के धन का नाश की सम्भावना को प्रकट कर रहा है ।
प्रायः ग्रहण का प्रभाव 15 दिन पहले से दिखाई देने लगता है यह एक विस्तृत चर्चा का विषय है प्रत्येक देश की कुंडली के साथ- साथ ग्रहणों का निरीक्षण किया जाता है ।
सबसे पहले हम तुला राशि एवं मेष राशि ग्रहणों के बारे मे विभिन्न ज्य़ोतिष-शास्त्रों में क्या कहा गया है, के बारे में जानते हैं–
भद्रबाहु संहिता -पेज नंबर 370 श्लोक 40– श्लोक – तुला राशि का ग्रहण पहाड़ी एवं पश्चिमी क्षेत्र में धार्मिक लोगों को पीड़ा एवं राजस्थान के लोग शोक ग्रस्त होंगे,मकर राशि का शनि उदय हो तो प्रशासकों म संघर्ष, राजनीतिक उलटफेर एवं लोहा महंगा होता है ।
मेष राशि चन्द्र ग्रहण हो तो -मनुष्य में पीड़ा होती है, पहाड़ी प्रदेश, पंजाब, दिल्ली ,दक्षिण भारत ,महाराष्ट्र ,आंध्र प्रदेश ,वर्मा आदि प्रदेशों के निवासियों को अनेक बीमारियों का सामना करना पड़ता है।
मंगलवार को सूर्य ग्रहण 16:17 मिनट पर हो रहा है – मंगल युद्ध का सूचक है, चोरों एवं अग्नि का उपद्रव, मानव एवं मध्य प्रदेश में पीड़ा होती है ,रुई कपास कपड़ा चांदी मोती सुपारी नारियल हिंदी चीनी तांबा मूंगा गेहूं चावल आदि महंगे होते हैं ।
सूर्यास्त के समय का ग्रहण -फसल को खतरा एवं राजा को खतरा दिखाता है ,बड़े व्यापारियों को कष्ट ,सेना में अशांति, बुद्धिजीवियों और विद्वानों को दुख होता है I
स्वाति नक्षत्र – में केतु के साथ सूर्य ,चंद्र एवं शुक्र अष्टम भाव में स्थित है अतः भद्रबाहु संहिता इसका उल्लेख इस प्रकार से मिलता है–स्वर्णकार ,चर्मकार ,कलिंग देश- वासी ,किरात एवं बर्बर जातियां , वैदिक,भील , पुलीन्द आदि जातियों का वध होता है ,सदृश्य केतु घात ,करते हैं तो व्याधि शस्त्र ,क्षुधा, मृत्यु एवं परशासन की सूचना देते हैं –भद्रबाहु सहिंता
भारत एवं विश्व के दक्षिण पश्चिम भूभाग में चोरों, अग्निकांड, महामारी, दुर्भिक्ष, युद्ध आदि से पीड़ा होती है, वायु तत्व प्रधान होने की वजह से अफवाहों के बाजार गर्म होंगे एवं आतंकी साजिश की संभावना के साथ-साथ बीमारियों की पूर्व सूचना भी यह ग्रहण दे रहा है।
ज्ञात हो कि 24 10 1995 7:22 पर 7:22 पर तुला राशि में ग्रहण हुआ था , मकर लग्न से दशम और चतुर्थ भाव पीड़ित था , – उस वर्ष 180 .4 मिलियन टन अनाज की कमी हुई थी और सरकार को गेहूं आयात करना पड़ा था, भारतीय राजनीति लगभग अस्त-व्यस्त हो गई थी I
उस वर्ष का ग्रहण लग्न में था , इस बार का ग्रहण अष्टम भाव में पड़ रहा है मकर राशि पहले से पीड़ित है और मकर राशि में स्थित शनि ने अष्टम भाव, अष्टमेश शुक्र, सूर्य चंद्र और केतु को पकड़ रखा है अतः व्याधि और तूफान का खतरा भारतवर्ष पर मंडरा रहा है , विशेषकर बच्चों से संबंधित खतरा ज्यादा दिखा रहा है, -कोविड-19 के नए वैरीअंट अपना दुष्प्रभाव दिखा सकते हैं I
राजनीति में बड़े उलटफेर की संभावना को भी यह ग्रहण दिखा रहा है जिसमें से क्षेत्र निम्न प्रकार से होंगे– उड़ीसा, गुजरात, राजस्थान एवं पहाड़ी क्षेत्रों में परिवर्तन दिख रहा है अथवा नए समीकरण बनने की संभावना प्रकट कर रहा है I
वायु जनित प्राकृतिक विनाश लीला एवं भयंकर तूफान को यह ग्रहण दिखा रहा है I
यद्यपि गुरु लग्न में लग्न के स्वामी के साथ-साथ दशम के स्वामी होकर स्थित है , और वहां से नवम और पंचम भाव को देखते भी हैं जिसका प्रभाव होगा कि सरकार की मजबूती बनी रहेगी, धर्म संगत कार्य होते रहेंगे नए कानून पारित हो सकते हैं।
सूर्य ग्रहण जब केतु के साथ होता है वह भी तुला राशि में तो देश में सांप्रदायिक सद्भावना बिगड़ जाती है इससे पहले 1984 में केतु द्वारा सूर्य ग्रहण हुआ था राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक उथल-पुथल के साथ सांप्रदायिकता के कारण ही की इंदिरा गांधी जी को अपने जीवन से हाथ धोना पड़ा था।
2004 में भी केतु के साथ सूर्य ग्रहण का प्रभाव सांप्रदायिक उन्माद एवं राजनीतिक उथल-पुथल के साथ देखने को मिला था।
यदि हम नवांश कुंडली का विश्लेषण करें तो तुला लग्न मिल रहा है वहां पर भी अष्टम भाव एवं लगन पीड़ित है।
जैमिनी दृष्टिकोण से भी जैमिनी दृष्टिकोण से भी पुत्रकारका पीड़ित है यह ग्रहण बार-बार – रोग ,व्याधि ,बच्चों को संकट को दिखा रहा है ,नट व्यवसाई कलाकारों के लिए भी यह ग्रहण अच्छा नहीं है, केतु छठे भाव में स्थित है उस पर बुध की दृष्टि है एक बार फिर धार्मिक उन्माद को दिखा रहा है यूनिफॉर्म सिविल कोड की तरफ सरकार के कदम बढ़ने के भी संकेत से सांप्रदायिक उन्माद की संभावना प्रकट हो रही है साथ ही भारत के सीमाओं पर भी तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।
(जया सिंह नई दिल्ली में रहती हैं। वह देश की जानी-मानी ज्योतिषाचार्य हैं।)

(फ़ोटो सौजन्य-सोशल मीडिया)




