संसद सत्र का छठा दिन भी हंगामेदार, लोकसभा दोपहर 12 बजे तक स्थगित, विपक्ष सरकार पर हमलावर

Lucknow Focus News Desk: संसद का मानसून सत्र सोमवार को छठे दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए मतदाता सूची, ऑपरेशन सिंदूर और डिंपल यादव पर की गई विवादित टिप्पणी को लेकर ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन किया। लगातार हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई।
लोकसभा अध्यक्ष की नाराजगी, बोले- आप खुद ही चर्चा से भाग रहे हैं
लोकसभा की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई, विपक्षी सांसद हंगामे पर उतर आए। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने नाराजगी जताते हुए कहा, “जब आपने ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा की मांग की थी, और अब जब चर्चा तय है तो फिर हंगामा क्यों?” उन्होंने विपक्ष से प्रश्नकाल चलने देने और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की। लेकिन विपक्षी सदस्य अपनी जगह डटे रहे, जिसके बाद अध्यक्ष ने कार्यवाही को दोपहर तक के लिए स्थगित कर दिया।
बिहार की मतदाता सूची पर सियासी घमासान
सदन के भीतर और बाहर बिहार में मतदाता सूची के एसआईआर (स्पेशल इंटेलिजेंस रिपोर्ट) को लेकर विपक्ष सरकार से लगातार जवाब मांग रहा है। विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं कि सरकार मतदाता सूची से छेड़छाड़ कर रही है। इस मुद्दे पर संसद भवन परिसर में भी कई दलों ने प्रदर्शन किया।
डिंपल यादव पर विवादित टिप्पणी को लेकर एनडीए का प्रदर्शन
सपा सांसद डिंपल यादव को लेकर ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी द्वारा की गई आपत्तिजनक टिप्पणी ने भी संसद में उबाल ला दिया। इस टिप्पणी के खिलाफ एनडीए सांसदों ने संसद परिसर में सपा प्रमुख अखिलेश यादव के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
भाजपा सांसद मेधा कुलकर्णी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मैं स्तब्ध हूं कि अखिलेश यादव चुप क्यों हैं, जबकि यह टिप्पणी उनकी पत्नी के लिए की गई है। यह तुष्टिकरण की राजनीति की पराकाष्ठा है।”
प्रदर्शन कर रहे सांसदों ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव जानबूझकर चुप हैं क्योंकि वे अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि सपा प्रमुख इस बयान की सार्वजनिक रूप से निंदा करें।
संसद में अब तक पांच दिन हंगामे की भेंट चढ़े
इस बार के मानसून सत्र की शुरुआत से ही संसद का माहौल गरमाया हुआ है। पहले पांच दिनों में लगभग कोई कामकाज नहीं हो सका है। विपक्ष ने हर मुद्दे—चाहे वह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा ऑपरेशन सिंदूर हो या फिर चुनाव से जुड़ी पारदर्शिता का सवाल—सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
नज़रें अब सरकार और विपक्ष के अगले कदम पर
आज के घटनाक्रम ने स्पष्ट कर दिया है कि सत्र के आगे के दिन भी आसान नहीं होने वाले। जहां सरकार अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश में है, वहीं विपक्ष हर मोर्चे पर उसे घेरने की रणनीति में लगा हुआ है।
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