संविधान के मूल्यों पर आधारित नाटक: युवाओं ने ‘स्वतंत्रता और बंधुत्व’ का संदेश देकर बटोरी खूब तालियां

Lucknow Focus News Desk: मदर सेवा संस्थान द्वारा बाल किलकारी सीज़न-5 का भव्य आयोजन आशा मंच, कोटवा (बक्शी का तालाब) में किया गया।
यूपी यूथ प्रोजेक्ट और संस्कृति निदेशालय के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में युवाओं ने संविधान के मूल अधिकारों पर आधारित नाटकों और गीतों की शानदार प्रस्तुति दी, जिसने दर्शकों को जागरूक होने का सरल और प्रभावशाली संदेश दिया।
नाट्य दिग्दर्शन, परिकल्पना और प्रस्तुति नियंत्रण महेश चंद्र देवा ने किया। ये प्रस्तुतियां 15 दिवसीय नाट्य कार्यशाला प्रशिक्षण के बाद मंचित की गईं।
1. नाटक: ‘आज़ादी की पहचान’ (मूल अधिकारों पर केंद्रित)
लेखन एवं निर्देशन: मोहम्मद अमन
यह नाटक संविधान के मूल अधिकार स्वतंत्रता पर केंद्रित था। इसमें सरल, जीवंत दृश्यों के माध्यम से दिखाया गया कि कैसे प्रत्येक नागरिक (वर्ग, धर्म या जाति से परे) समान अधिकारों का हकदार है।
नाटक में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, और जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे महत्वपूर्ण अधिकारों को दर्शाया गया। नाटक ने दर्शकों को यह संदेश दिया कि अधिकार केवल किताबों में लिखी बातें नहीं, बल्कि दैनिक जीवन को दिशा देने वाली शक्तियां हैं। पात्रों ने अंत में अपने अधिकारों का पालन करने और दूसरों की स्वतंत्रता की रक्षा करने की प्रतिज्ञा ली।
2. नाटक: ‘रिश्तों की डोर’ (बंधुत्व और एकता पर केंद्रित)
लेखन एवं निर्देशन: श्रीकांत गौतम
यह नाटक समाज में बंधुत्व, एकता और आपसी सहयोग के महत्व पर आधारित था। कहानी एक ऐसे गांव की है, जहाँ स्वार्थ और भेदभाव के कारण लोग एक-दूसरे से दूर हो गए हैं। मुख्य पात्र अमित, अपने मित्र रवि, समाजसेवी रीना, और बुजुर्ग मोहन की मदद से गाँव में बंधुत्व और सहयोग का अभियान शुरू करता है।
धीरे-धीरे गांव के लोग भेदभाव भुलाकर एक साथ काम करने लगते हैं, जिससे सामूहिक शिक्षा, सेवा और मेल-मिलाप की भावना बढ़ती है। अंत में सभी ने “चलो मिलकर कदम बढ़ाएं” गीत गाकर एकता, प्रेम और भाईचारे का प्रतीक बनाया।
संस्थान के सचिव महेश चंद्र देवा ने बताया कि संस्था के 21 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 26 नवंबर को संविधान दिवस और 14 दिसंबर को संवैधानिक नाट्य समारोह का विशेष आयोजन किया जाएगा।




