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एक रुपये में बिकी थी यह कंपनी, आज 579 करोड़ में बनी टीम इंडिया की जर्सी स्पॉन्सर

Lucknow Focus News Desk: भारतीय क्रिकेट टीम को एक नया जर्सी स्पॉन्सर मिल गया है: अपोलो टायर्स। यह कंपनी अब अगले तीन सालों के लिए 579 करोड़ रुपये का करार कर भारतीय टीम की जर्सी पर अपना नाम चमकाएगी। यह वही कंपनी है, जिसकी कहानी मुश्किलों भरी रही है, और एक समय में इसके मालिक ने अपने बेटे को इसे महज एक रुपये की प्रतीकात्मक कीमत में बेचने का ऑफर दिया था।

जब कंपनी की हालत थी खस्ता

साल 1975 में इमरजेंसी के दौरान, अपोलो टायर्स की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई थी। कंपनी को गंभीर वित्तीय समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। तब कंपनी के संस्थापक रौनक सिंह ने इस डूबते हुए बिजनेस को अपने बेटे ओंकार कंवर को एक रुपये में देने का प्रस्ताव दिया। ओंकार ने इस चुनौती को स्वीकार किया और कंपनी को एक नए मुकाम पर पहुँचा दिया। आज अपोलो टायर्स का मार्केट कैप 31 हजार करोड़ रुपये के करीब है।

कैसे बनी अपोलो टायर्स एक बड़ी कंपनी?

अपोलो टायर्स की शुरुआत 1972 में गुरुग्राम में हुई थी। 1975 में केरल के पेरंब्रा में इसका पहला कारखाना शुरू हुआ।

1980 में ओंकार कंवर ने कंपनी की कमान संभाली और इसका पुनर्गठन शुरू किया। उन्होंने भारतीय सड़कों के लिए खास ट्रक टायरों पर ध्यान केंद्रित किया और कर्मचारियों की सैलरी को उनकी प्रोडक्टिविटी से जोड़ा।

कंपनी ने 1990 के दशक में भारत में अपना विस्तार किया। 1991 में गुजरात और 1995 में केरल में नए प्लांट खोले। 1990 के अंत तक यह भारत की शीर्ष टायर निर्यातक कंपनी बन गई।

2009 में अपोलो ने नीदरलैंड की कंपनी व्रेडेस्टीन बैंडेन बी.वी. को खरीदकर वैश्विक बाजार में कदम रखा। आज भारत के अलावा नीदरलैंड और हंगरी में भी इसके कारखाने हैं, जो 100 से अधिक देशों में टायर सप्लाई करते हैं।

शेयरों में उछाल

भारतीय टीम की जर्सी स्पॉन्सर बनने की खबर आते ही अपोलो टायर्स के शेयरों में भी उछाल आया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर कंपनी के शेयर 1.56% की तेजी के साथ ₹486.80 पर बंद हुए।

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