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यूपी सरकार का यह अध्यादेश किरायेदार-मकान मालिक दोनों के लिए है, जानिए Detail


JANUARY 9, 2021
लखनऊ (UP News)।
क्या आप किरायेदार हैं? या आपने अपने मकान को किराये पर उठा रखा है? आपके घर या वाणिज्यिक भवन में किरायेदार रहते हैं या व्यावसायिक प्रतिष्ठान चलते हैं। अगर ऐसा है तो यूपी सरकार (UP Government) द्वारा शुक्रवार को जारी किया गया यह अध्यादेश UP Tenancy Regulation Ordinance- 2021 आपके लिए ही है। आपको इसके बारे में जान लेना चाहिए।
उत्तर प्रदेश में अब किरायेदारी को लेकर मकान-मालिकों और किरायेदारों के बीच झगड़ों में कमी आएगी। प्रदेश मंत्रिमंडल द्वारा कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के जरिये शुक्रवार को उत्तर प्रदेश नगरीय परिसरों की किरायेदारी विनियमन अध्यादेश-2021 (UP Tenancy Regulation Ordinance- 2021)को मंजूरी देने के बाद ऐसी संभावना को बल मिला है। दो-तीन दिनों में इसको प्रदेश में लागू कर दिए जाने की संभावना है। इस संबंध में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को अध्यादेश लाने के निर्देश दिए थे। उद्देश्य था-किरायेदारों और मकान मालिकों के बीच के विवादों में कमी लाना। इस अध्यादेश में किरायेदार और मकान मालिक दोनों के ही हितों के संरक्षण का ध्यान रखा गया है।

नए अध्यादेश में कुछ इस तरह के प्रावधान हैं-
-इस अध्यादेश के लागू हो जाने के बाद बिना अनुबंध पत्र के किरायेदार रखने पर प्रतिबंध लग जाएगा।
-किसी को भी किराये पर रखने के पहले मकान मालिक के लिए इसकी सूचना अनिवार्य रूप से किराया प्राधिकरण को देना होगा।
-किराया प्राधिकरण का गठन बहुत जल्दी किया जाएगा।
-इस संबंध में पहले के लागू अधिनियम की बहुत सी शर्तें पहले की तरह लागू रहेंगी। उनमें जरूरी हेरफेर किया गया है।
-किराया प्राधिकरण को किराये संबंधी विवादों का दो महीने में अनिवार्य रूप से निस्तारण करना होगा।
-किराये में वार्षिक वृद्धि से पांच से सात फीसदी के बीच ही हो सकेगी। मनमाना किराया वृद्धि (जैसे दस फीसदी, 15 फीसदी) नहीं की जा सकेगी।
-पांच से सात फीसदी वार्षिक किराया वृद्धि में भी रिहायशी मकानों की पांच फीसदी तक और वाणिज्यिक स्थानों की सात फीसदी तक वार्षिक किराया वृद्धि की जा सकेगी।
-मकान मालिक को किरायेदार को किराये की रसीद हर हाल में देनी होगी।
-किरायेदार को अनुबंध अवधि के दरम्यान घर से बेदखल नहीं किया जा सकेगा।
-हां, अगर किरायेदार दो महीने तक किराया नहीं देता है तो मकान मालिक उसको हटा सकेंगे।
-मकान मालिक को किरायेदार को अनिवार्य सेवाएं देनी होंगी।
-किरायेदार को भी समय पर किराया देना और अपने परिसर की सार-संभाल अनिवार्य रूप से करनी होगी।
-अगर पहले से निवास कर रहे किरायेदारों के साथ अनुबंध-पत्र साइन नहीं किया गया है, तो दोनों पक्षों को इसके लिए तीन महीने का समय दिया जाएगा।
-अनुबंध-पत्र की दो मूल प्रति बनवानी होगी। दोनों की एक-एक मूल प्रति दोनों पक्षों के पास रहेगी।
-रिहाइशी घरों के लिए मकान मालिक दो महीने से अधिक का किराया पेशगी नहीं ले सकेंगे। इसी तरह, वाणिज्यिक स्थानों के मामले में छह महीने तक का किराया पेशगी लिया जा सकेगा।

-अभी तक प्रदेश में उत्तर प्रदेश शहरी भवन (किराये पर देने, किराये तथा बेदखली का विनियमन) अधिनियम लागू था। यह 1972 का बना हुआ था।
उल्लेखनीय है कि मकान मालिकों और किरायेदारों के बीच मुकदमों की बढ़ती संख्या से परेशान होकर उच्च न्यायालय ने इस संबंध में सरकार को आगामी 11 जनवरी, 2021 तक अध्यादेश लाने के निर्देश दिए थे।
(सिंबोलिक फोटो-सोशल मीडिया)
Tenancy Regulation Ordinance- 2021, UP Cabinet, UP Government, UP News

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