उत्तर प्रदेश

आज की भाजपा स्व.बाजपेयी की नहीं सिर्फ एक व्यक्ति की है-अशोक वानखेड़े 

सिद्धार्थनगर (वि.)। देश में लोकतंत्र की ऐसी हालत पहले कभी नहीं थी। जो भाजपा स्व.अटल बिहारी की थी,यह वो भाजपा नहीं है। आज की भाजपा सिर्फ एक व्यक्ति की होकर रह गई है। यह ऐसी भाजपा है जो 80 करोड़ को मुफ्त राशन देने में गर्व करती है, जबकि किसी भी सरकार के लिए यह शर्म की बात है।

बेबाक अंदाज में विभिन्न न्यूज चैनलों पर अपनी बात रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार अशोक वानखेड़े जो कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे, ने कहा आजादी के बाद ऐसा कभी नहीं था जब इतनी बड़ी आबादी को सरकारी इमदाद पर पेट भरना पड़ा हो। जबकि देश तब इतना आज के जितना संपन्न नहीं था और टैक्स के जरिए जनता का खून चूसा जा रहा था। कहा कि गांधी ने ऐसे आजाद भारत की कल्पना कभी नहीं की थी। आज हम गौतम बुद्ध की धरती पर हैं जहां से सत्य,प्रेम और अहिंसा का संदेश पूरी दुनिया तक गया, देश के हालात देख कहने को मजबूर हूं कि वे यदि आज होते तो सरकार द्वारा प्रायोजित हालात से निपटने के लिए हिंसा की भी गुंजाइश जरूर रखे होते।

अगस्त क्रांति दिवस (नौ अगस्त) के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में गांधी और आजादी पर बोलते हुए उन्होंने कहा गांधी वह ताकत थे जिनके सामने गोडसे और सावरकर समर्थकों को शीर्ष झुकाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान एक विभिन्न जाति धर्म के लोगों की फुलवारी है। विभिन्न रंगों के इस फुलवारी को रौंदा जा रहा है। गांव से शहर तक भाईचारगी को खत्म कर नफरत बोया जा रहा है। उन्होंने बड़े साफ लहजों में कहा ये धरती ताकतें कुछ भी कर लें इन नफरतई ताकतों का पराजय तय हैं।

कार्यक्रम में पधारे भोपाल से पधारे गांधीवादी विचारक वरिष्ठ पत्रकार डा.राकेश पाठक ने तबके गांधी और आज के गांधी पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा गांधी जबतक जीवित थे, अंग्रेजों से लड़े, देश आजाद हुआ तो आजादी का जश्न भी नहीं मना पाए, अंग्रेजों की तरफदारी करने वाले शख्स गोडसे के हाथों मारे गए। अफसोस कि इसी नौ अगस्त को मुंबई में उनके प्रपौत्र तुषार गांधी को घंटों नजर बंद रखा गया। उन्होंने कहा कि देश को कितने बलिदान के बाद आजादी मिली,आजकी हुकूमत नहीं समझ पा रही। आज हमारी आजादी और लोकतंत्र दोनों खतरे में है।

कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार कुतबुल्लाह, शीतल पी सिंह और है राम टू जो श्रीराम नामक चर्चित पुस्तक के लेखक तथा पब्लिक इंडिया न्यूज़ के संपादक आनंदवर्धन सिंह, वरिष्ठ पत्रकार यशोदा श्रीवास्तव ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का आयोजन मौलाना अब्दुल कयूम रहमानी फाउंडेशन के तत्वाधान में आयोजित था, जिसके फाउंडर बदरे आलम लखनऊ, दिल्ली में ऐसे आयोजन करते रहते हैं। कार्यक्रम का संचालन पत्रकार सगीर ख़ाकसार ने किया।

 

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