उत्तर प्रदेश

UP News: सभी 120 SNCU में खुलेंगे ‘लैक्टेशन मैनेजमेंट यूनिट’, एक्सक्लूसिव स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए सरकार का बड़ा फैसला

Lucknow Focus News Desk: उत्तर प्रदेश में नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य में सुधार और ‘एक्सक्लूसिव स्तनपान’ (Exclusive Breastfeeding) को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। इस साल के अंत तक प्रदेश के सभी 120 ‘सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट’ (SNCU) में ‘लैक्टेशन मैनेजमेंट यूनिट’ (LMU) स्थापित कर दिए जाएंगे।

विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर यूनिसेफ (UNICEF) परिसर में आयोजित मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के महाप्रबंधक डॉ. मिलिंद वर्धन ने यह जानकारी साझा की।

अब तक 11 हजार से ज्यादा नवजात लाभांवित

सक्रिय यूनिट्स: वर्तमान में प्रदेश के 34 SNCU में LMU सफलतापूर्वक कार्य कर रहे हैं, जिनसे अप्रैल से जुलाई के बीच 11,000 से अधिक नवजात शिशु लाभांवित हो चुके हैं।

प्रशिक्षण पूरा: 36 अन्य SNCU में स्वास्थ्यकर्मियों और स्टाफ को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जहाँ जल्द ही सेवाएं शुरू हो जाएंगी।

स्तनपान दर में गिरावट चिंता का विषय: डॉ. मिलिंद वर्धन

डॉ. वर्धन ने बताया कि बीते 3-4 वर्षों में एक्सक्लूसिव स्तनपान की दर 60% से घटकर 35% पर आ जाना एक गंभीर विषय है।

प्रदेश में 86% से अधिक संस्थागत प्रसव (Institutional Deliveries) होने के बावजूद केवल 43% बच्चों को ही जन्म के तुरंत बाद मां का दूध मिल पाता है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि स्तनपान केवल एक मां की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए पूरे समाज, परिवार और कार्यस्थलों के सहयोग की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों के मुख्य विचार एवं सुझाव

स्कूल शिक्षा में शामिल हो जागरूकता (डॉ. एस.एन. सिंह, विभागाध्यक्ष – बाल रोग, KGMU) बच्चों को स्कूली शिक्षा के समय से ही स्तनपान का महत्व बताया जाना चाहिए। मां का दूध शिशु को डायरिया, निमोनिया और संक्रमण से बचाता है तथा उसकी आंतों को मजबूत करता है। ऑपरेशन (सिजेरियन) से जन्मे बच्चों को भी मां के संपर्क में लाकर स्तनपान कराना बेहद जरूरी है।

दो बच्चों में 3 साल का अंतर जरूरी (डॉ. अंजू अग्रवाल, विभागाध्यक्ष – स्त्री रोग, KGMU) मां अपने पहले बच्चे को सही तरीके से 2 साल तक स्तनपान करा सके, इसके लिए दो बच्चों के जन्म के बीच कम से कम 3 साल का अंतर होना अनिवार्य है।

IMS एक्ट का उल्लंघन अपराध (डॉ. आकाश पंडिता, बाल रोग विशेषज्ञ, मेदांता) ‘इन्फेंट मिल्क सब्स्टीट्यूट्स’ (IMS) एक्ट के तहत 2 साल तक के बच्चों के लिए डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों और बेबी फॉर्मूला के प्रचार पर सख्त प्रतिबंध है। उल्लंघन करने पर 6 महीने से 5 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।

कामकाजी माताओं के लिए क्रेच और ‘पैटर्नटी लीव’ (रबि नारायन परही, पोषण विशेषज्ञ, यूनिसेफ) दफ्तरों और संस्थानों में ब्रेस्टफीडिंग रूम और क्रेच की सुविधा होनी चाहिए। इसके अलावा, माताओं का सहयोग करने के लिए पिताओं को ‘पैटर्नटी लीव’ (Paternity Leave) देने का प्रावधान होना चाहिए।

ग्रामीण स्तर पर अभियान: ICDS की डिप्टी डायरेक्टर डॉ. अनुपमा शांडिल्य ने बताया कि प्रदेश की 1.84 लाख आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां और सहायिकाएं गांव-गांव जाकर स्तनपान के प्रति जागरूकता फैला रही हैं।

Related Articles

Back to top button