उत्तर प्रदेश

लखनऊ: साप्ताहिक विज्ञान रेडियो कार्यक्रम ‘कहानी धरती की’ का शुभारंभ

Lucknow Focus News Desk: एशिया का एकमात्र संस्थान, जो विशेष रूप से पुराविज्ञान (पैलियोसाइंसेज़) को समर्पित है—बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (बीएसआईपी) समाज तक विज्ञान को पहुंचाने के उद्देश्य से एक अभिनव साप्ताहिक रेडियो कार्यक्रम “कहानी धरती की – जहां धरती बोलेगी और हम सब सुनेंगे” लेकर आया है। इस कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर बीएसआईपी ऑडिटोरियम, लखनऊ में किया गया।

कार्यक्रम का प्रसारण 3 मार्च 2026 से प्रारंभ होगा और यह प्रत्येक मंगलवार दोपहर 3:00 बजे से 4:00 बजे तक रेडियो केजीएमयू 89.6 MHz पर सुना जा सकेगा। यह कार्यक्रम केजीएमयू गूंज मोबाइल ऐप के माध्यम से वैश्विक श्रोताओं के लिए भी उपलब्ध रहेगा।

यह कार्यक्रम बीएसआईपी के साइंस कम्युनिकेशन फॉर पब्लिक एंगेजमेंट एंड पार्टनरशिप प्रोग्राम के अंतर्गत रेडियो केजीएमयू गूंज के साथ संयुक्त रूप से निर्मित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य सुलभ रेडियो माध्यम के ज़रिए पृथ्वी पर करोड़ों वर्षों में घटित घटनाओं और प्रमुख वैज्ञानिक तथ्यों को, विशेषकर विद्यार्थियों और युवा श्रोताओं के लिए, सरल भाषा में प्रस्तुत करना तथा पृथ्वी के इतिहास और उसके महत्व की गहन समझ विकसित करना है।

पोस्टर एवं प्रोमो का विमोचन

इस अवसर पर बीएसआईपी के निदेशक प्रो. महेश जी ठक्कर तथा रेडियो केजीएमयू गूंज के कार्यकारी प्रमुख प्रो. के.के.सिंह ने संयुक्त रूप से रेडियो विज्ञान कार्यक्रम कहानी धरती की के आधिकारिक पोस्टर एवं प्रोमो ऑडियो का विमोचन किया। साथ ही उद्घाटन कड़ी का एक संक्षिप्त ऑडियो संस्करण भी श्रोताओं के लिए प्रस्तुत किया गया।

उद्घाटन कार्यक्रम में डॉ. अरविन्द माथुर, प्रांत अध्यक्ष, अवध विज्ञान भारती, विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर रेडियो केजीएमयू गूंज की स्टेशन मैनेजर श्रीमती शालिनी गुप्ता, बीएसआईपी के वैज्ञानिक-जी डॉ.अनुपम शर्मा, तथा बीएसआईपी के वैज्ञानिक एवं रेडियो कार्यक्रम समन्वयक डॉ. निमिष कपूर ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

अनुसंधान और समाज के बीच सेतु

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. महेश जी. ठक्कर, निदेशक, बीएसआईपी ने कहा कि कहानी धरती की  कार्यक्रम का उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान और समाज के बीच की दूरी को पाटना है। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम पृथ्वी के विकास की रोचक कहानियों को सरल और आकर्षक ढंग से प्रस्तुत करेगा। उन्होंने सामूहिक विलुप्ति की घटनाएँ, डायनासोरों का युग, उल्कापिंडीय टक्करों, ज्वालामुखीय विस्फोटों, मानव विकास और अंतिम हिमयुग जैसे विषयों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये केवल वैज्ञानिक विषय नहीं, बल्कि ऐसी सशक्त कथाएँ हैं जो हमारे ग्रह की गतिशील प्रकृति को समझने में मदद करती हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि रेडियो ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचने का एक प्रभावी माध्यम है, जिससे वैज्ञानिक ज्ञान अकादमिक संस्थानों से बाहर निकलकर सीधे गाँवों और समुदायों तक पहुँच सकता है। प्रो. ठक्कर ने “150 वैज्ञानिक, 150 कहानियाँ” की परिकल्पना साझा करते हुए बताया कि इस श्रृंखला के माध्यम से प्रत्येक वैज्ञानिक के कार्य को कई कड़ियों में प्रस्तुत किया जा सकता है, जिससे विज्ञान कथाओं का एक दीर्घकालिक संग्रह तैयार होगा।

विज्ञान जनसंपर्क का सशक्त माध्यम: सामुदायिक रेडियो

मुख्य अतिथि प्रो. के. के. सिंह, कार्यकारी प्रमुख, रेडियो केजीएमयू गूंज ने विज्ञान संचार में सामुदायिक रेडियो की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रेडियो केजीएमयू गूंज, जिसे एक मेडिकल विश्वविद्यालय द्वारा संचालित किया जाता है, शिक्षा और जनसंपर्क के लिए एक प्रभावी मंच बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक तापन, विकासवाद और जलवायु परिवर्तन आज के समय की सबसे गंभीर वैज्ञानिक चुनौतियां हैं।

विकास और जलवायु परिवर्तन के बीच संबंध को स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि ऐतिहासिक जलवायु परिवर्तनों ने प्रजातियों के विकास, अनुकूलन और विलुप्ति को प्रभावित किया है। इन प्रक्रियाओं को समझना वर्तमान पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने रेडियो के माध्यम से कहानी धरती की के शुभारंभ को पृथ्वी विज्ञान के प्रति जन-जागरूकता की दिशा में एक सराहनीय पहल बताया।

विज्ञान, समावेशन और जन सहभागिता

मुख्य अतिथि डॉ. अरविंद माथुर ने पृथ्वी की आयु निर्धारित करने से जुड़ी वैज्ञानिक खोजों पर प्रकाश डालते हुए इसे आधुनिक भूविज्ञान और रेडियोमेट्रिक विज्ञान की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि विज्ञान विविधता और समावेशन से और अधिक सशक्त बनता है तथा विज्ञान में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अनुसंधान, नेतृत्व और विज्ञान संचार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर बल दिया।

डॉ. माथुर ने ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँचने तथा युवा पीढ़ी को प्रेरित करने में रेडियो जैसे ऑडियो माध्यमों की भूमिका को भी रेखांकित किया।

बीएसआईपी के वैज्ञानिक-जी डॉ. अनुपम शर्मा ने कहा कि “सभी के लिए विज्ञान” की भावना ही इस प्रकार की पहलों की मूल प्रेरणा है। उन्होंने कहानी धरती की को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर एक समयोचित और प्रशंसनीय पहल बताते हुए कहा कि समाज में वैज्ञानिक चेतना विकसित करने के लिए सतत विज्ञान संचार आवश्यक है। उन्होंने टीम को प्रोत्साहित करते हुए कहा, “यह एक अच्छी पहल है—इसे निरंतर जारी रखें।”

रेडियो केजीएमयू गूंज की स्टेशन मैनेजर डॉ. शालिनी गुप्ता ने कहा कि रेडियो आज भी संचार का एक बुनियादी और अग्रणी माध्यम है, जो विशेष रूप से जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़ने में अत्यंत प्रभावी है।

कार्यक्रम की परिकल्पना

कहानी धरती की के समन्वयक एवं बीएसआईपी के वैज्ञानिक डॉ. निमिष कपूर ने बताया कि यह कार्यक्रम एक अनूठी विज्ञान संचार पहल है, जिसके अंतर्गत बीएसआईपी के वैज्ञानिक सीधे श्रोताओं से संवाद करेंगे। वे पुराविज्ञान, जीवाश्म विज्ञान, पुरावनस्पति विज्ञान, भूविज्ञान और पृथ्वी विज्ञान की प्रासंगिकता को समझाते हुए पृथ्वी के अतीत, वर्तमान और भविष्य से जोड़ेंगे।

प्रत्येक साप्ताहिक कड़ी में यह बताया जाएगा कि एशिया की एकमात्र पुराविज्ञान प्रयोगशाला—बीएसआईपी—के वैज्ञानिक भूवैज्ञानिक अतीत से साक्ष्य एकत्र कर उनका विश्लेषण कैसे करते हैं, ताकि एक सतत भविष्य सुनिश्चित किया जा सके। कार्यक्रम में जलवायु परिवर्तन अनुसंधान, पर्यावरणीय पुनर्निर्माण, जैव-विविधता के विकास और सतत योजना में बीएसआईपी के योगदान को भी रेखांकित किया जाएगा।

प्रसारण और उपलब्धता

रेडियो केजीएमयू गूंज को केजीएमयू गूंज मोबाइल ऐप, 89.6 मेगाहर्ट्ज़ एफएम, तथा केजीएमयू की आधिकारिक वेबसाइट पर लाइव स्ट्रीमिंग के माध्यम से सुना जा सकता है। कहानी धरती की की कड़ियाँ शीघ्र ही बीएसआईपी की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराई जाएँगी, ताकि व्यापक जनसमुदाय तक इसकी पहुँच सुनिश्चित हो सके।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य पृथ्वी विज्ञान से जुड़े शोध और खोजों को रोचक, समावेशी तथा सरल भाषा में आम जनता तक पहुँचाना है।

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