कविता: माँ क्या होती है…

माँ…
माँ सिर्फ एक शब्द नहीं,
पूरा ब्रह्मांड है।
माँ सिर्फ जन्म देने वाली नहीं,
जीवन सँवारने वाली पहचान है।
माँ क्या होती है?
माँ वह है जो हमारे पहले आँसू से पहले ही रो लेती है।
माँ वह है जो हमारे भूख लगने से पहले ही थाली सजा देती है।
माँ वह है जो हमारी थकान को बिना कहे समझ लेती है।
माँ वह है जो अँधेरे में भी हमें उजाला दिखाती है।
माँ त्याग है – जो अपनी इच्छाएँ भूलकर हमारे सपनों को पूरा करती है।
माँ तप है – जो हर दर्द को सहकर भी हमें मुस्कुराना सिखाती है।
माँ ममता है – जो एक नजर से सारी थकान मिटा देती है।
माँ दुआ है – जो बिना माँगे हमें अनगिनत आशीर्वाद देती रहती है।
माँ वह है –
जो सर्दी में ठिठुर जाए पर हमें गर्म रखे,
बरसात में भीग जाए पर हमें छाया दे,
भूखी रह जाए पर हमें कौर खिला दे,
जागती रहे पर हमें चैन की नींद सुला दे।
माँ की गोदी सबसे सुरक्षित पनाहगाह है,
माँ का आंचल सबसे पावन मंदिर है,
माँ की आँखें सबसे निर्मल झील हैं,
माँ का हृदय सबसे विशाल सागर है।
अगर भगवान हर जगह नहीं पहुँच सकते,
तो उन्होंने माँ को बनाया।
क्योंकि माँ में ही सृष्टि की पूरी करुणा,
संसार की पूरी ममता और
जीवन की पूरी ताक़त छुपी होती है।
इसलिए…
माँ कोई “चीज़” नहीं होती,
माँ तो खुद में पूरी दुनिया होती है।
विमलेश तिवारी ‘विशु’




