देर से नींद खुलना या रातभर जागना क्यों? जानिए शरीर की ‘प्राकृतिक घड़ी’ सर्कैडियन रिदम का विज्ञान

Lucknow Focus News Desk: क्या आप जानते हैं कि कुछ लोग सुबह जल्दी क्यों उठ जाते हैं, जबकि कुछ देर रात तक जागते रहते हैं? इस अंतर के पीछे आपके शरीर की प्राकृतिक 24 घंटे की घड़ी काम करती है, जिसे सर्कैडियन रिदम (Circadian Rhythm) कहा जाता है। यह सिर्फ सोने-जागने के चक्र को ही नहीं, बल्कि आपके हार्मोन, पाचन और शरीर के तापमान को भी नियंत्रित करती है।
क्या है सर्कैडियन रिदम?
सर्कैडियन रिदम वह जैविक प्रक्रिया है जो आपके शरीर के 24 घंटे की दिनचर्या तय करती है कि आपको कब सोना है, कब जागना है, कब सुस्ती आएगी और कब एनर्जी महसूस होगी। यह आपके मस्तिष्क द्वारा नियंत्रित होती है। आपके दिमाग के हाइपोथैलेमस में स्थित सुप्राकियास्मैटिक न्यूक्लियस (SCN) नामक छोटा हिस्सा इसका कंट्रोल सेंटर होता है।
SCN रोशनी को मुख्य सिग्नल मानता है। जब सुबह की रोशनी आँखों में पड़ती है, तो SCN नींद लाने वाले हार्मोन मेलाटोनिन का उत्पादन कम करने का संदेश भेजता है, जिससे शरीर सक्रिय हो जाता है। इसके विपरीत, अंधेरा होने पर मेलाटोनिन रिलीज होने लगता है, जिससे नींद आती है।
उम्र के साथ बदलाव
युवा: आजकल के युवाओं की सर्कैडियन रिदम अक्सर बिगड़ी होती है। उनका मेलाटोनिन स्तर देर रात (10 या 11 बजे के बाद) ही बढ़ता है, इसलिए उन्हें सुबह देर तक सोना पड़ता है। युवाओं को अभी भी रात में 9 से 10 घंटे की नींद ज़रूरी है।
बुजुर्ग (60+): 60 वर्ष से अधिक आयु के लोग अपनी लय में बदलाव महसूस कर सकते हैं, जैसे जल्दी सोना और जल्दी उठना। यह उम्र बढ़ने का एक सामान्य हिस्सा है।
रिदम बिगड़ने के दुष्प्रभाव
सर्कैडियन रिदम बिगड़ने से कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं:
घाव भरने में देरी
हार्मोन में परिवर्तन
पाचन संबंधी समस्याएं
शरीर के तापमान में उतार-चढ़ाव
एनर्जी की कमी और मेमोरी लॉस
सर्कैडियन रिदम को सही करने के उपाय
रिदम को सही रखने के लिए 24 घंटे नियम के साथ चलना ज़रूरी है:
सुबह की रोशनी: देर तक सोने के बजाय उजाला होते ही उठ जाएं और बाहर रोशनी में घूमें।
फिजिकल एक्टिविटी: दिनचर्या की शुरुआत फिजिकल एक्टिविटी से करें।
रात में परहेज: सोने के 2 घंटे पहले ब्लू लाइट (मोबाइल/लैपटॉप) से दूर रहें।
शांत आदतें: सोने से पहले किताब पढ़ें या मेडिटेशन करें।
अन्य परहेज: कैफीन, निकोटीन और शराब के सेवन से बचें। दोपहर या शाम को सोने (नैप लेने) से बचें।




