World Lung Cancer Day: फेफड़ों के कैंसर के इन शुरुआती लक्षणों को न करें नजरअंदाज

Lucknow Focus News Desk: फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer) वर्तमान में दुनिया भर के लिए एक बेहद गंभीर और जानलेवा स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के एक अनुमान के मुताबिक, हर साल वैश्विक स्तर पर 25 लाख से अधिक लोगों में इस खतरनाक बीमारी का निदान होता है, जिनमें से 18 लाख से अधिक लोग अपनी जान गंवा देते हैं। भारत में भी लंग कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो गहरी चिंता का विषय है। इसी बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने, इसका जल्द पता लगाने और प्रभावितों की मदद करने के उद्देश्य से हर साल 1 अगस्त को ‘वर्ल्ड लंग कैंसर डे’ (विश्व फेफड़ा कैंसर दिवस) मनाया जाता है।
समय पर निदान ही जान बचाने की एकमात्र कुंजी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि फेफड़ों के कैंसर से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण सही समय पर बीमारी का पता न चल पाना है। अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार, यह कैंसर काफी साइलेंट होता है और ज्यादातर मामलों में शुरुआती चरण में इसके कोई साफ लक्षण दिखाई नहीं देते। इसके कई लक्षण आम बीमारियों (जैसे सामान्य खांसी या इंफेक्शन) से मिलते-जुलते हैं, जिसके कारण लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, यदि सामान्य दवाओं से भी आराम न मिले, तो तुरंत जांच करानी चाहिए।
लंग कैंसर के शुरुआती लक्षण
यदि शरीर में निम्नलिखित में से कोई भी संकेत लगातार बने रहें, तो बिना देरी किए फेफड़ों की जांच करानी चाहिए:
- लगातार खांसी: कई सप्ताह तक रहने वाली या लगातार बढ़ती जाने वाली खांसी।
- सीने में दर्द: छाती में ऐसा दर्द जो गहरी सांस लेने, खांसने या हंसने पर और ज्यादा बढ़ जाए।
- आवाज में बदलाव: आवाज का बैठ जाना या लंबे समय तक भारी/कर्कश बने रहना।
- अचानक वजन घटना: बिना किसी स्पष्ट डाइट या वर्कआउट के तेजी से वजन कम होना।
- सांस की तकलीफ: सामान्य काम करने पर भी सांस फूलना या सांस लेने में कठिनाई होना।
- लगातार कमजोरी: शरीर में लगातार थकान और अत्यधिक कमजोरी का अहसास होना।
- बार-बार इंफेक्शन: बार-बार निमोनिया होना या फेफड़ों का संक्रमण पूरी तरह ठीक न होना।
कैंसर के दूसरे अंगों में फैलने के लक्षण
जब फेफड़ों का कैंसर (Metastasis) शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाता है, तो स्थिति अधिक गंभीर हो जाती है और मरीज में ये लक्षण दिख सकते हैं।
- हड्डियों (विशेषकर पीठ या कूल्हों) में लगातार तेज दर्द होना।
- सिरदर्द, अचानक चक्कर आना, या शरीर के किसी हिस्से में सुन्नपन व कमजोरी आना।
- चलने-फिरने या शरीर का संतुलन बनाने में कठिनाई होना।
- त्वचा और आंखों का रंग पीला पड़ना (पीलिया के लक्षण)।
- गर्दन या शरीर के अन्य हिस्सों में मौजूद लिम्फ नोड्स (Lymph Nodes) में सूजन आना।
बचाव के उपाय: इन बातों का रखें विशेष ध्यान
आमतौर पर माना जाता है कि लंग कैंसर सिर्फ धूम्रपान (Smoking) करने वालों को होता है, लेकिन यह उन लोगों को भी प्रभावित कर सकता है जिन्होंने कभी सिगरेट को हाथ नहीं लगाया। इसलिए बचाव के लिए निम्नलिखित कदम उठाएं:
- पैसिव स्मोकिंग से बचें: सिर्फ खुद धूम्रपान छोड़ना काफी नहीं है, बल्कि ‘सेकेंडहैंड स्मोक’ (दूसरों के धूम्रपान का धुआं) और अत्यधिक वायु प्रदूषण से भी दूरी बनाना बेहद जरूरी है।
- पौष्टिक आहार: अपने दैनिक भोजन में ताजे फल, हरी पत्तेदार सब्जियां और पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार को शामिल करें।
- फिजिकल एक्टिविटी: फेफड़ों की कार्यक्षमता (Lung Capacity) को बेहतर बनाए रखने के लिए नियमित रूप से व्यायाम, योग और प्राणायाम (श्वास संबंधी अभ्यास) करें।
- पारिवारिक इतिहास (Family History): यदि परिवार में पहले किसी को फेफड़ों का कैंसर रहा हो, तो डॉक्टरों की सलाह पर समय-समय पर रूटीन चेकअप कराते रहें।
अस्वीकरण : यह रिपोर्ट केवल पाठकों की जानकारी और जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार की गई है। लेख में उल्लिखित किसी भी लक्षण या संदिग्ध स्थिति में तुरंत अपने नजदीकी योग्य डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श लें।
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