Year Ender 2025: आर्थिक सुधारों का ‘सुपर ईयर’; 12 लाख तक की आय टैक्स फ्री और जीएसटी में बड़ा बदलाव

Lucknow Focus News Desk: वर्ष 2025 भारतीय अर्थव्यवस्था के इतिहास में बड़े और साहसी सुधारों के गवाह के रूप में दर्ज किया गया है। वैश्विक मंदी की आहट और अनिश्चितताओं के बीच भारत सरकार ने घरेलू खपत को बढ़ावा देने के लिए आयकर (Income Tax) और जीएसटी (GST) जैसे बुनियादी ढांचों में आमूल-चूल परिवर्तन किए हैं।
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इनकम टैक्स: 1961 का कानून खत्म, 12 लाख तक कोई टैक्स नहीं
2025 की सबसे बड़ी उपलब्धि ‘नया आयकर अधिनियम, 2025’ रहा। सरकार ने छह दशक पुराने जटिल कानूनों को हटाकर एक सरल व्यवस्था पेश की है, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी। नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) के तहत अब 12 लाख रुपये तक की सालाना कमाई पर ‘शून्य’ टैक्स लगेगा।
नए टैक्स स्लैब: 0 – 4 लाख: 0%
4 – 8 लाख: 5%
8 – 12 लाख: 10%
और इसी क्रम में 24 लाख से ऊपर पर 30%।
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GST में सुधार: 375 वस्तुएं हुईं सस्ती
22 सितंबर 2025 से जीएसटी के ढांचे को तर्कसंगत बनाया गया। सरकार ने 4-स्तरीय जटिल ढांचे को मुख्य रूप से दो दरों 5% और 18% में समेट दिया है। लगभग 375 वस्तुओं और सेवाओं पर टैक्स की दरें कम की गईं, जिससे रोजमर्रा की चीजें सस्ती हुईं। हालांकि नवंबर 2025 में संग्रह गिरकर 1.70 लाख करोड़ रहा, लेकिन सरकार को उम्मीद है कि कम दरों से बाजार में मांग बढ़ेगी।
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8वें वेतन आयोग का गठन
साल के अंत में केंद्र सरकार ने 1 करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी सौगात दी। 8वें वेतन आयोग के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में इसकी सिफारिशें लागू होने से सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में भारी उछाल आएगा, जिससे बाजार में नकदी का प्रवाह बढ़ेगा।
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बीमा क्षेत्र में 100% FDI और नए लेबर कोड
‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने के लिए दो बड़े कदम उठाए गए। बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा 74% से बढ़ाकर 100% कर दी गई। अब विदेशी कंपनियां भारत में अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली शाखाएं खोल सकेंगी। वर्षों से लंबित चार नए श्रम संहिताओं को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की प्रक्रिया तेज हुई, जिससे श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा और कंपनियों को नियमों में सुगमता मिलेगी।
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कस्टम ड्यूटी (सीमा शुल्क) का सरलीकरण
आयकर और जीएसटी के बाद अब सरकार का अगला लक्ष्य कस्टम ड्यूटी सुधार है। औद्योगिक वस्तुओं पर अतिरिक्त सीमा शुल्क दरों को खत्म कर स्लैब की संख्या घटाकर 8 कर दी गई है। इसका उद्देश्य आयात-निर्यात की प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाना है।




