उत्तर प्रदेश

बाराबंकी में ‘मूर्खिस्तान’ की 42वीं सरकार का गठन, मंत्रियों ने ली ‘पद के दुरुपयोग’ की शपथ

Lucknow Focus News Desk: बाराबंकी जनपद में 42 वर्षों से चली आ रही अनूठी और व्यंग्यात्मक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए ‘मूर्खिस्तान’ की नई सरकार का गठन किया गया। लखपेड़ाबाग लॉन में आयोजित ‘बकवास सम्मेलन’ के दौरान गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा निकाली गई और कैबिनेट मंत्रियों का अधिवेशन हुआ। इस दौरान लोकतंत्र की विसंगतियों पर कटाक्ष करते हुए मंत्रियों को जनहित के बजाय ‘पद के दुरुपयोग’ की शपथ दिलाई गई।

अशोक सैनी राष्ट्रपति और डॉ. फिदा हुसैन बने प्रधानमंत्री

सम्मेलन में सर्वसम्मति से अशोक सैनी को ‘मूर्खिाधिराज’ (राष्ट्रपति) चुना गया, जबकि डॉ. फिदा हुसैन को प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई। केके द्विवेदी और कपिल यादव को उप-प्रधानमंत्री बनाया गया। राष्ट्रपति अशोक सैनी ने अपने संबोधन में शहर की ऐतिहासिकता पर व्यंग्य करते हुए कहा कि कभी यह शहर गधों का चारागाह हुआ करता था, जिसे अब स्थाई सरकार बनाकर ‘विकसित’ करने की जरूरत है।

व्यंग्यात्मक मंत्रालयों का अनूठा बंटवारा

मूर्खिस्तान की कैबिनेट में मंत्रियों को ऐसे विभाग सौंपे गए जो सीधे तौर पर व्यवस्था पर तंज कसते हैं। मंत्रियों ने अपने-अपने विभागों का ‘विनाशकारी’ रोडमैप भी पेश किया।

अन्याय बढ़ाओ व कानून मिटाओ मंत्री: अधिवक्ता अखिलेश सिंह (इन्होंने जजों का चुनाव जनता से कराने का प्रस्ताव रखा)।

स्वास्थ्य मंत्री: डॉ. रवि आहूजा (इन्होंने संक्रामक रोग बढ़ाने का रोडमैप दिया)।

शिक्षा विनाश मंत्री: डॉ. अम्बरीश ‘अम्बर’।

युवा बिगाड़ मंत्री: साहब नारायण शर्मा।

कृषि एवं उद्यान विनाश मंत्री: अनिल श्रीवास्तव ‘लल्लू’।

महिला कल्याण विभाग: 81 वर्षीय सनत कुमार ‘अनाड़ी’।

अन्य विभाग: ‘मच्छर विकास मंत्री’ रामू सैनी, ‘माफिया बढ़ाओ मंत्री’ धीरज गुलसिया और ‘जल प्रदूषण बढ़ाओ मंत्री’ बलराम सैनी ने भी शपथ ली।

तीखे शब्दों से ‘धिक्कार’ और सभा का समापन

सभा की शुरुआत पारंपरिक रूप से एक-दूसरे को ‘धिक्कारने’ के साथ हुई, जिसके बाद कवियों ने अपनी हास्य रचनाओं से समां बांधा। रत्नेश कुमार ने सभा का संचालन करते हुए 42वीं सरकार के गठन का प्रस्ताव रखा। अंत में ‘मूर्खिस्तान जिंदाबाद’ के नारों के साथ सभा का समापन हुआ। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य हास्य-व्यंग्य के माध्यम से समाज और राजनीति की बुराइयों पर प्रहार करना था।

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