गोरखपुर में बनेगा उत्तर भारत का पहला वानिकी विश्वविद्यालय, कैबिनेट ने दी ‘अध्यादेश-2026’ को मंजूरी

Lucknow Focus News Desk: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में गोरखपुर के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। शहर को अपना पांचवां विश्वविद्यालय मिलने जा रहा है, जो न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे उत्तर भारत का पहला वानिकी (Forestry) विश्वविद्यालय होगा। कैबिनेट ने ‘उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय अध्यादेश-2026’ के प्रख्यापन को हरी झंडी दे दी है।
कैम्पियरगंज बनेगा ‘ग्रीन एजुकेशन’ का हब
यह विश्वविद्यालय गोरखपुर के कैम्पियरगंज क्षेत्र में स्थापित किया जाएगा। इसके निर्माण से जुड़ी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं। इस भव्य प्रोजेक्ट की कुल लागत ₹491 करोड़ से अधिक है। योगी सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष के बजट में इसके लिए शुरुआती ₹50 करोड़ आवंटित कर दिए हैं। गोरखपुर वन प्रभाग ने इसके लिए 50 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की है। खास बात यह है कि यह परिसर दुनिया के पहले राजगिद्ध (जटायु) संरक्षण केंद्र के बिल्कुल समीप होगा। मुख्यमंत्री ने 6 सितंबर 2024 को जटायु संरक्षण केंद्र के उद्घाटन के दौरान ही इसकी घोषणा की थी, जिसे अब कैबिनेट की औपचारिक मुहर मिल गई है।
रोजगारपरक और आधुनिक पाठ्यक्रम
इस विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करना है। यहाँ निम्नलिखित विषयों में B.Sc, M.Sc, PhD और डिप्लोमा कोर्स संचालित होंगे।
वानिकी एवं एग्रोफॉरेस्ट्री (कृषि वानिकी)
वन्य जीव संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन
औद्यानिकी (Horticulture) और फल बागवानी
प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और जैव विविधता
युवाओं और किसानों को होगा सीधा लाभ
गोरखपुर के प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) विकास यादव के अनुसार, विश्वविद्यालय में पढ़ाई जाने वाली तकनीक से न केवल छात्रों को नौकरियों के अवसर मिलेंगे, बल्कि क्षेत्र के किसानों को भी आधुनिक बागवानी और वानिकी का प्रशिक्षण मिलेगा। इससे प्रदेश में हरित क्षेत्र (Green Cover) बढ़ाने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
गोरखपुर की नई पहचान: ‘शिक्षा और संरक्षण का संगम’
गोरखपुर अब केवल एम्स (AIIMS) और खाद कारखाने के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यावरण अनुसंधान के लिए भी जाना जाएगा। जटायु संरक्षण केंद्र के बाद वानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना योगी सरकार की ‘ग्रीन ग्रोथ’ नीति का एक बड़ा प्रमाण है। अब जल्द ही इस प्रोजेक्ट के शिलान्यास की तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
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