नौतपा का टॉर्चर: जानिए आखिर कितनी गर्मी झेल सकता है इंसानी शरीर, किस तापमान के बाद ‘जवाब’ देने लगते हैं अंग?

Lucknow Focus News Desk: मई का महीना अपने चरम पर है और अगले कुछ ही दिनों में ‘नौतपा’ की शुरुआत होने वाली है, जिसे साल का सबसे गर्म दौर माना जाता है। इस दौरान उत्तर और मध्य भारत के कई इलाकों में पारा 50 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच जाता है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि हमारा शरीर अधिकतम कितनी गर्मी बर्दाश्त कर सकता है, और किस सीमा के बाद बढ़ती तपिश सीधे हमारे दिमाग, दिल और किडनी को नुकसान पहुंचाने लगती है।
37°C है शरीर का ‘कम्फर्ट जोन’, जानिए कैसे काम करता है नेचुरल एसी
वैज्ञानिकों के अनुसार, इंसानी शरीर का सामान्य आंतरिक तापमान करीब 37°C होता है। इस तापमान पर हमारे सभी अंग (दिल, दिमाग, लिवर, किडनी) सबसे बेहतर तरीके से काम करते हैं।
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प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम: जब बाहरी तापमान बढ़ता है, तो हमारा शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए त्वचा के रोमछिद्रों से पसीना बाहर निकालता है। हवा के संपर्क में आकर जब यह पसीना सूखता है (Evaporation), तो शरीर को अंदरूनी ठंडक मिलती है। यह बिल्कुल वैसे ही काम करता है जैसे मिट्टी का घड़ा पानी ठंडा करता है।
किस तापमान के बाद फेल होने लगता है शरीर?
विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर के इस नेचुरल ‘कूलिंग सिस्टम’ की भी एक तय सीमा है:
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40°C पार होते ही खतरा: यदि बाहरी तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाए और हवा में नमी (उमस) ज्यादा हो, तो पसीना सूखना बंद हो जाता है। ऐसी स्थिति में शरीर खुद को ठंडा नहीं रख पाता और अंदरूनी तापमान तेजी से बढ़ने लगता है।
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50°C पर अंगों का फेल होना: वैज्ञानिक मानते हैं कि 50°C के आसपास के तापमान में लंबे समय तक रहना इंसानी जीवन के लिए बेहद घातक है। इस स्थिति में शरीर का थर्मोरेगुलेटरी सिस्टम (तापमान नियंत्रित करने वाली प्रणाली) पूरी तरह टूट जाता है। पानी की कमी के कारण खून गाढ़ा होने लगता है, ब्लड प्रेशर असंतुलित हो जाता है और हार्ट रेट तेजी से बढ़ती है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई रुक सकती है।
गर्मी का शरीर पर ‘स्टेप-बाय-स्टेप’ असर:
जब आप भीषण हीटवेव या नौतपा की धूप में लगातार बने रहते हैं, तो शरीर इन 5 चरणों में प्रभावित होता है।
| चरण (Stage) | शरीर पर होने वाला असर (Effects) |
| 1. डिहाइड्रेशन | पसीने के रूप में अत्यधिक पानी और जरूरी मिनरल्स (इलेक्ट्रोलाइट्स) बाहर निकल जाते हैं। |
| 2. हीट क्रैम्प्स | पानी और नमक की कमी के कारण हाथों, पैरों और पेट की मांसपेशियों में तेज दर्द और ऐंठन होने लगती है। |
| 3. हीट एक्सॉशन | शरीर में भारी कमजोरी, तेज चक्कर आना, सिरदर्द, जी मिचलाना और अत्यधिक पसीना आना। |
| 4. ब्लड प्रेशर पर असर | दिल को शरीर को ठंडा रखने के लिए तेजी से पंप करना पड़ता है, जिससे हार्ट रेट बढ़ती है और दिल पर दबाव आता है। |
| 5. हीट स्ट्रोक (लू लगना) | यह सबसे खतरनाक स्थिति है। शरीर का तापमान 104°F (40°C) के पार हो जाता है, पसीना आना बंद हो जाता है और व्यक्ति बेहोश हो सकता है। |
नौतपा में इन 3 वर्गों को सबसे ज्यादा खतरा
मौसम विभाग और डॉक्टरों ने साफ किया है कि इस भीषण तपिश का सबसे घातक असर तीन श्रेणियों के लोगों पर पड़ता है:
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बच्चे: उनका शरीर वयस्कों की तुलना में तापमान को जल्दी संतुलित नहीं कर पाता।
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बुजुर्ग: बढ़ती उम्र के साथ शरीर की आंतरिक प्रणाली और रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है।
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गंभीर मरीज: दिल, बीपी, शुगर और किडनी की बीमारी से पीड़ित लोगों के अंग अत्यधिक गर्मी का दबाव नहीं झेल पाते।




