गवर्नेंस एंड पॉलिसी

झांसी की ग्रीनफील्ड इंडस्ट्रियल सिटी परियोजना को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने दी आधिकारिक स्वीकृति

Lucknow Focus News Desk: बुंदेलखंड क्षेत्र के आर्थिक एवं औ‌द्योगिक कायाकल्प की दिशा में योगी सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों की दिशा में आज एक ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित हुआ है। भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने बुंदेलखंड औ‌द्योगिक विकास प्राधिकरण झांसी की ‘ग्रीनफील्ड इंडस्ट्रियल सिटी (बीडा मास्टर प्लान-2045)’ परियोजना को आधिकारिक रूप से पर्यावरणीय स्वीकृति प्रदान कर दी है।

परियोजना की मुख्य रूपरेखा एवं भूमि उपयोग

यह महापरियोजना 253.33 वर्ग किलोमीटर (62,599.20 एकड़) क्षेत्रफल में विकसित की जाएगी, जिसके अंतर्गत झांसी तहसील के 33 ग्रामीण क्षेत्र शामिल हैं। इस परियोजना को पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006 की अनुसूची के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया था। इस स्तर की बड़ी परियोजनाओं के लिए निर्धारित कठोर मानकों के अनुरूप बीडा ने संपूर्ण प्रक्रिया को समयबद्ध एवं पारदर्शी ढंग से पूर्ण किया।

मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने 30 जून, 2025 में इस प्रोजेक्ट की रूपरेखा को परखा, और 20 जुलाई 2025 को मंत्रालय ने इसे अपनी पहली मंजूरी दे दी। स्थानीय नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए 22 दिसंबर, 2025 को झांसी में अपर जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में जनसुनवाई आयोजित की गई। इसके लिए 20 नवंबर, 2025 को प्रमुख समाचार पत्रों में सार्वजनिक सूचना प्रकाशित की गई थी। जन सुनवाई में स्थानीय जनता ने परियोजना का व्यापक समर्थन किया।

परियोजना से संबंधित सभी पर्यावरणीय पहलुओं, तकनीकी विवरणों और आवश्यक सुधारों की विशेषज्ञ समिति द्वारा दिनांक 5 मार्च और 9-10 अप्रैल 2026 विस्तार से समीक्षा की गई। सभी मानकों को संतोषजनक पाए जाने के बाद समिति ने परियोजना को पर्यावरणीय स्वीकृति देने की सिफारिश की। पर्यावरण मंत्रालय एवं विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति के सुझावों के आधार पर संशोधित मास्टर प्लान के अंतर्गत भूमि का प्रस्तावित भू-उपयोग आवंटन निम्नानुसार किया गया है:

औ‌द्योगिक क्षेत्र (33.02%): 83.66 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र औ‌द्योगिक विकास हेतु आरक्षित है, जहाँ मुख्य रूप से कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र, रक्षा उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर तथा इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग स्थापित किए जाएंगे।

आवासीय एवं आबादी क्षेत्र (16.90%): नए आवासीय क्षेत्रों हेतु 37.40 वर्ग किलोमीटर तथा मौजूदा ग्रामीण आबादी हेतु 5.40 वर्ग किलोमीटर भूमि निर्धारित की गई है।

हरित एवं मनोरंजक क्षेत्र (24.92%): कुल 63.13 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को हरित क्षेत्र (ग्रीन जोन) के रूप में संरक्षित रखा गया है।

परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स (11.56%): सड़क, रेल तथा लॉजिस्टिक्स हब के विकास हेतु 29.30 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र आवंटित किया गया है।

व्यावसायिक, मिश्रित एवं अन्य उपयोग: शेष भूमि को व्यावसायिक (3.92 वर्ग किलोमीटर), मिश्रित उपयोग (13.02 वर्ग किलोमीटर) तथा सार्वजनिक संस्थानों के लिए आरक्षित किया गया है।

हरित बफर जोन: परियोजना सीमा पर 50 मीटर तथा डोंगरी बांध के चारों ओर 150 मीटर चौड़ा ग्रीन बेल्ट विकसित किया जाएगा। “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के माध्यम से व्यापक वृक्षारोपण भी किया जाएगा।

शून्य तरल विसर्जन: शहर की पेयजल आवश्यकता (217.22 एमएलडी) राजघाट बांध से पूरी की जाएगी, जबकि अन्य उपयोगों हेतु उपचारित जल का प्रयोग किया जाएगा। बीडा द्वारा 163.26 एमएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तथा 150.88 एमएलडी क्षमता का कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट चरणबद्ध रूप से स्थापित किया जाएगा। उपयोग किए गए जल का उपचार कर पुनः उपयोग किया जाएगा तथा किसी भी प्रकार का अपशिष्ट जल बेतवा, पहुज एवं अंगौरी नदियों में नहीं छोड़ा जाएगा।

सफल भूमि अधिग्रहणः बीडा द्वारा अब तक कुल 25706 एकड़ भूमि का अर्जन किया जा चुका है भूमि स्वामियों को अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अनुसार पारदर्शी दरों पर मुआवजा प्रदान किया जा रहा है।

ग्रामीण आबादी का विकासः स्थानीय ग्रामीण आबादी क्षेत्रों को बीडा शहर के साथ एकीकृत करते हुए आधुनिक पार्क, स्वास्थ्य केंद्र, शैक्षणिक संस्थान एवं कौशल विकास केंद्र जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी।

बुंदेलखंड के विकास के इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआतः सीईओ

बीडा के सीईओ संजय कुमार खत्री ने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय से प्राप्त यह पर्यावरणीय स्वीकृति बुंदेलखंड के विकास के इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप बीडा को देश की सबसे आधुनिक, सतत एवं पर्यावरण-अनुकूल औ‌द्योगिक स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। पर्यावरणीय स्वीकृति में निर्धारित सभी शर्तों का पूर्ण अनुपालन करते हुए यह परियोजना बुंदेलखंड को वैश्विक विनिर्माण मानचित्र पर स्थापित करेगी तथा स्थानीय नागरिकों के जीवन स्तर में व्यापक सुधार लाएगी, साथ ही यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Also Read: UP से फाइलेरिया के खात्मे का फाइनल राउंड! 13 जून से 27 जिलों में शुरू होगा ‘नाइट ब्लड सर्वे’, रात 10 बजे के बाद घर आएगी टीम

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button