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न्यायाधिकरणों में नियुक्तियों के लिए बनेगा ‘राष्ट्रीय आयोग’, केंद्र सरकार अगले सप्ताह लोकसभा में पेश करेगी नया विधेयक

Lucknow Focus News Desk: केंद्र सरकार न्यायाधिकरणों (Tribunals) में नियुक्तियों की व्यवस्था को नए सिरे से व्यवस्थित करने की तैयारी में है। विभिन्न न्यायाधिकरणों के अध्यक्षों और सदस्यों के चयन के लिए एक स्वतंत्र आयोग गठित करने वाला विधेयक अगले सप्ताह लोकसभा में पेश किया जाएगा। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद उठाया जा रहा है।

प्रस्तावित ‘न्यायाधिकरण सुधार विधेयक’ का मुख्य उद्देश्य विभिन्न न्यायाधिकरणों में अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति, चयन तथा उनकी योग्यता में दक्षता बढ़ाना, संस्थागत स्वतंत्रता सुनिश्चित करना, स्पष्ट मानक, पारदर्शी प्रक्रिया और एकरूपता कायम करना है।

राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग का स्वरूप और संरचना

अगले सप्ताह लोकसभा में पेश किए जाने वाले इस विधेयक में एक स्वतंत्र ‘राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग’ के गठन का प्रावधान किया गया है:

मुख्यालय: राष्ट्रीय राजधानी (नई दिल्ली)।

संरचना: आयोग में कुल एक अध्यक्ष और चार सदस्य (2 न्यायिक सदस्य तथा 2 तकनीकी सदस्य) शामिल होंगे।

अध्यक्ष की पात्रता: सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या किसी हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश इस आयोग का अध्यक्ष बनने के लिए पात्र होंगे।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला और नए कानून की जरूरत

लोकसभा सदस्यों को वितरित किए गए विधेयक में उल्लेख किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में ‘न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम, 2021’ के कुछ प्रावधानों को रद्द कर दिया था। शीर्ष अदालत ने उन प्रावधानों को शक्तियों के पृथक्करण और न्यायिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों के विपरीत माना था। अदालत का कहना था कि वे प्रावधान न्यायाधिकरणों के कामकाज, कार्यकाल और चयन मानकों से जुड़े पिछले न्यायिक फैसलों के अनुरूप नहीं थे।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसे स्वतंत्र एवं पेशेवर विशेषज्ञता वाले ‘राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग’ के गठन का निर्देश दिया था, जो चयन एवं नियुक्ति के लिए पारदर्शी प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था अपना सके।

विधेयक के अन्य प्रमुख प्रावधान

इस विधेयक के कानून बनने के बाद ‘न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम, 2021’ पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। प्रस्तावित नए कानून में शामिल विभिन्न न्यायाधिकरणों के अध्यक्षों और सदस्यों की योग्यताओं को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, चयन की प्रक्रिया, नियुक्ति, वेतन एवं भत्ते, इस्तीफा, पद से हटाने तथा सेवा की अन्य शर्तों से जुड़े विस्तृत प्रावधान भी इसमें शामिल किए गए हैं।

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