टीबी के खिलाफ प्रदेश में विशेष अभियान जारी रहेगा, बीपाल ट्रीटमेंट और निक्षय पोर्टल पर पंजीकरण को प्राथमिकता: प्रमुख सचिव

Lucknow Focus News Desk: उत्तर प्रदेश में चल रहे 100 दिवसीय विशेष सघन ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) नियंत्रण अभियान की गतिविधियों को निरंतर जारी रखने के निर्देश प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य पार्थ सारथी सेन शर्मा ने दिए हैं। उन्होंने प्रदेश के सभी जिला क्षय रोग अधिकारियों (डीटीओ) को निर्देशित किया है कि अधिक से अधिक मरीजों को खोजा जाए, उच्च जोखिम वाले मरीजों की पहचान कर उन्हें समुचित उपचार प्रदान किया जाए और सभी जानकारी निक्षय पोर्टल पर दर्ज की जाए।
टीबी पर रोकथाम के लिए बीपाल ट्रीटमेंट और टीपीटी पर जोर
प्रमुख सचिव ने मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर) टीबी मरीजों के लिए बीपाल रेजिमेन (बेडाकुलिन, प्रिटोमेनिड, लिनेजोलिड, मोक्सिफ्लॉक्सिन) सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (टीपीटी) सभी पात्र मरीजों को दिए जाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन के लिए चलाया जा रहा विशेष सघन अभियान केवल 100 दिन तक सीमित न रहे, बल्कि इसे नियमित रूप से जारी रखा जाए।
यह निर्देश बीते शुक्रवार को राजधानी के एक होटल में आयोजित दो दिवसीय समीक्षा एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में दिए गए, जिसमें सभी जिलों के डीटीओ और आगरा, लखनऊ, बरेली, गोरखपुर व वाराणसी के मेडिकल कॉलेजों के माइक्रोबायोलॉजिस्ट भाग ले रहे हैं। इस प्रशिक्षण का पहला चरण 9 मई को संपन्न हुआ, जबकि दूसरा चरण 14-15 मई को आयोजित किया जाएगा।
इस अवसर पर महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. रतनपाल सिंह सुमन ने कहा कि टीबी के उच्च जोखिम वाले मरीजों की विशेष निगरानी की जाए और सभी को समय पर समुचित इलाज उपलब्ध कराया जाए।
राष्ट्रीय कार्यक्रम निदेशक डॉ. सीमा श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि वर्तमान में भारत में टीबी की वार्षिक गिरावट दर 2.5% है, जिसे 10% तक लाना लक्ष्य है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एक्टिव टीबी न होने की पुष्टि के बाद ही टीपीटी शुरू किया जाना चाहिए।
राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. शैलेन्द्र भटनागर ने निक्षय पोर्टल के महत्व और केस पंजीकरण की प्रक्रिया पर विस्तृत चर्चा करते हुए कहा कि इस वर्ष के अंत तक देश को टीबी मुक्त भारत बनाने के लिए हर प्रयास महत्वपूर्ण है।




