वाश शैली के प्रख्यात चित्रकार राजीव मिश्र का निधन, कला जगत में शोक की लहर

Lucknow Focus News Desk: उत्तर प्रदेश की कला-संस्कृति के लिए एक अपूरणीय क्षति के रूप में प्रख्यात वाश शैली चित्रकार राजीव मिश्र का 26 मई को लखनऊ में निधन हो गया। वे 64 वर्ष के थे। उनका जन्म 1 मार्च 1961 को मैनपुरी में हुआ था।
राजीव मिश्र उत्तर प्रदेश के उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल थे, जिन्होंने पारंपरिक वाश पद्धति को जीवित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस शैली की नींव जाने-माने चित्रकार बद्री नाथ आर्य ने रखी थी, और राजीव मिश्र ने इसे आगे बढ़ाने का काम पूरी निष्ठा और समर्पण से किया।
मृदुभाषी, विनम्र और संघर्षशील व्यक्तित्व के धनी राजीव मिश्र बचपन से ही कला के प्रति समर्पित थे। उनके एक करीबी सहयोगी और वरिष्ठ कलाकार ने बताया, “अपने प्रशिक्षण काल से ही राजीव मेरे संपर्क में रहे हैं। उनकी कला यात्रा को मैंने बेहद करीब से देखा है। वे किसी भी कला विधा में प्रयोग करने से कभी पीछे नहीं हटे।”
हालांकि उनकी प्रमुख पहचान वाश शैली के एक विशेषज्ञ कलाकार के रूप में रही, लेकिन उन्होंने कला की विविध विधाओं में कार्य किया। सेवानिवृत्त होने के बाद वे एक नई दिशा में रचनात्मकता की तलाश कर रहे थे। इसी क्रम में वे एक विशाल पेंटिंग पर काम कर रहे थे, जो अब उनकी अंतिम कृति बन गई है।
राजीव मिश्र के असमय निधन से न केवल कला जगत, बल्कि उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को भी गहरी क्षति पहुँची है। उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा।




