उत्तर प्रदेश

बाराबंकी के राजकीय पुस्तकालय में रेडक्रॉस ने सौंपा पल्स ऑक्सीमीटर, विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए सराहनीय कदम

Lucknow Focus News Desk: जनसेवा की मिसाल पेश करते हुए इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी, बाराबंकी ने जिले के राजकीय पुस्तकालय को एक पल्स ऑक्सीमीटर प्रदान किया। यह उपकरण पुस्तकालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों की स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सौंपा गया है।

यह पहल रेडक्रॉस सोसायटी के चेयरमैन शैलेन्द्र सिंह के नेतृत्व में की गई। उन्होंने पुस्तकालय की प्रभारी डॉ. पूनम सिंह को ऑक्सीमीटर सौंपते हुए कहा, “कोरोना महामारी ने हम सभी को स्वास्थ्य के प्रति अधिक सतर्क कर दिया है। हाल ही में देश में फिर से संक्रमण की खबरें आ रही हैं। ऐसे में ऐहतियात के तौर पर यह उपकरण छात्रों की सुरक्षा के लिए दिया गया है। रेडक्रॉस सोसायटी समाज सेवा के लिए हमेशा तत्पर है।”

सेवा भावना की पहचान बनी रेडक्रॉस

इस अवसर पर रेडक्रॉस के वाइस चेयरमैन, अधिवक्ता हुमायूँ नईम खान ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए कहा पीड़ित मानवता की निःस्वार्थ सेवा करना रेडक्रॉस की पहचान है। बाराबंकी में इस भावना को मजबूत करते हुए यह संस्था लगातार जनहितकारी कार्यों में लगी है।

पुस्तकालयाध्यक्ष ने जताया आभार

डॉ. पूनम सिंह, जो राजकीय पुस्तकालय की पुस्तकालयाध्यक्ष हैं, ने इस योगदान को सहृदयता से स्वीकार करते हुए कहा “हमारे पुस्तकालय में पुस्तकें, फर्नीचर और अन्य सामग्री समाजसेवियों द्वारा दान स्वरूप दी गई हैं। इस कड़ी में रेडक्रॉस द्वारा दिया गया पल्स ऑक्सीमीटर एक महत्वपूर्ण और व्यावहारिक संसाधन है, जो विद्यार्थियों के लिए आपातकालीन स्थिति में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। उन्होंने रेडक्रॉस सोसायटी और उपस्थित पदाधिकारियों के प्रति धन्यवाद भी प्रकट किया।

उपस्थित गणमान्य व्यक्ति और छात्र

इस अवसर पर रेडक्रॉस के संरक्षक सदस्य आशीष वर्मा, आजीवन सदस्य राजीव श्रीवास्तव, डॉ. मंजुलता गुप्ता, सतीश यादव, रत्नेश कुमार सहित पुस्तकालय में अध्ययनरत अनेक छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

रेडक्रॉस प्रतिनिधियों ने छात्रों से संवाद कर उनका कुशलक्षेम जाना और पुस्तकालय की उत्कृष्ट व्यवस्था के लिए डॉ. पूनम सिंह को बधाई दी।

इस योगदान के माध्यम से रेडक्रॉस सोसायटी, बाराबंकी ने एक बार फिर यह साबित किया है कि स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में जनसेवा की भावना के साथ किया गया छोटा-सा प्रयास भी बड़ी सकारात्मक छाप छोड़ सकता है। यह पहल न केवल छात्रों की भलाई के लिए सराहनीय है, बल्कि समाज को स्वास्थ्य और जागरूकता के प्रति प्रेरित भी करती है।

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