यूपी में मातृ मृत्यु दर घटाने को बड़ा कदम: अब प्रसूता की मौत पर 24 घंटे के भीतर होगा ऑडिट
एसीएस अमित कुमार घोष के निर्देश, दैनिक समीक्षा कर चिन्हित जिलों में उठाए जाएंगे सुधारात्मक कदम, आरआरटीसी ट्रेनिंग से 10 साल में 25% घटी एमएमआर

Lucknow Focus News Desk: उत्तर प्रदेश में मातृ मृत्यु दर (MMR) को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। अब प्रदेश में किसी भी प्रसूता की मृत्यु होने पर 24 घंटे के भीतर उसका ऑडिट किया जाएगा। कारणों की पहचान कर संबंधित जिले में तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। अपर मुख्य सचिव (एसीएस) चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, अमित कुमार घोष ने ये निर्देश दिए हैं।
केजीएमयू के कलाम सेंटर में रीज़नल रिसोर्स ट्रेनिंग सेंटर (RRTC) कार्यक्रम के 10 वर्ष पूरे होने पर आयोजित समीक्षा कार्यशाला में एसीएस मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने 28 नवनिर्मित स्वायत्त मेडिकल कॉलेजों और सभी जिला महिला अस्पतालों के डॉक्टरों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की हिदायत दी।
दैनिक स्तर पर होगी ऑडिट और समीक्षा
एसीएस ने कहा कि पहले यह ऑडिट साप्ताहिक होता था, लेकिन अब दैनिक आधार पर किया जाएगा। यदि किसी विशेष जिले में प्रसूता मृत्यु के मामले बार-बार आ रहे हैं, तो वहां विशेष ध्यान देकर काम किया जाएगा।
10 वर्षों में 25% घटी मातृ मृत्यु दर
कार्यशाला में जानकारी दी गई कि यूपीटीएसयू (UPTSU) के सहयोग से संचालित आरआरटीसी कार्यक्रम के तहत अब तक 1,791 डॉक्टरों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। इसके परिणामस्वरूप, वर्ष 2016 में 197 प्रति लाख रहने वाली एमएमआर वर्ष 2026 में घटकर 154 पर आ गई है यानी बीते एक दशक में इसमें 25 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
केजीएमयू की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने बताया कि डॉक्टरों को प्रशिक्षित करने से अब हाई-रिस्क प्रेगनेंसी मामलों को रेफर करने के बजाय अस्पतालों में ही संभाला जा रहा है, जिससे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर जनता का भरोसा बढ़ा है।




