‘घुसपैठियों के बहाने देश को कागजी जंजाल में न फंसाए सरकार’, मायावती का सरकार पर तीखा हमला

Lucknow Focus News Desk: 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर जहाँ देश अपनी मजबूती का जश्न मना रहा है, वहीं बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने देश के मौजूदा हालातों को लेकर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गिरते रुपये से लेकर देश के भीतर नागरिकता से जुड़े दस्तावेजी विवादों पर अपनी गंभीर चिंता जताई।
दस्तावेजी जंजाल और घुसपैठियों का मुद्दा
मायावती ने वोटर लिस्ट और नागरिकता की पहचान के मुद्दे पर सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि घुसपैठियों को पहचान कर बाहर निकालना सही है, लेकिन इसकी आड़ में 100 करोड़ भारतीयों को कागजी जंजाल में फंसाना और उन्हें शक के घेरे में खड़ा करना बिल्कुल गलत है। उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी प्रक्रिया ऐसी रखनी चाहिए जिससे आम नागरिक को परेशानी न हो।
अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर बसपा सुप्रीमो ने कड़ा प्रहार किया। उन्होंने सवाल उठाते हुए पूछा “क्या रुपया अब एक डॉलर के मुकाबले 100 के पार जाकर ही दम लेगा?” मायावती ने कहा कि दुनिया के बदलते हालातों के बीच भारत की स्थिति कितनी स्थिर है, यह आत्मचिंतन का विषय है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि केवल दावों के बजाय देश को असल मायने में आत्मनिर्भर बनाने के सार्थक प्रयास किए जाएं।
धर्म परिवर्तन और विभाजनकारी राजनीति
धर्म परिवर्तन के मुद्दे पर मायावती ने सरकार के कड़े कानूनों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा यदि कड़े कानूनों के बाद भी मामले नहीं रुक रहे, तो सरकार को मूल समस्या को समझना होगा। धर्म परिवर्तन की आड़ में होने वाली विभाजनकारी राजनीति और हिंसा पर तुरंत लगाम लगनी चाहिए, क्योंकि यह देशहित में नहीं है।
मायावती ने अपने बयान के अंत में उन बुनियादी मुद्दों को उठाया जो उनके राजनीतिक एजेंडे के केंद्र में रहते हैं। उन्होंने कहा कि महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी और जातिवाद के कारण बहुजन समाज का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। सामाजिक और आर्थिक असमानता के कारण लोगों के जीवन स्तर में लगातार गिरावट आ रही है, जो बेहद चिंताजनक है।




