टाटा संस और Tata Trust में टकराव: चंद्रशेखरन के दोबारा चेयरमैन बनने के फैसले को टाटा ट्रस्ट्स ने बताया ‘गैर-कानूनी’

Lucknow Focus News Desk: टाटा संस और इसके सबसे बड़े शेयरधारक Tata Trust के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। टाटा संस के बोर्ड द्वारा एन. चंद्रशेखरन को अगले 5 साल के लिए दोबारा चेयरमैन नियुक्त करने के प्रस्ताव को टाटा ट्रस्ट्स ने कानूनी रूप से अमान्य (शून्य) करार देते हुए खारिज कर दिया है।
टाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि कंपनी के नियमों (Articles of Association) के अनुसार, चेयरमैन की नियुक्ति के लिए ट्रस्ट्स के दोनों नामित (नॉमिनी) निदेशकों की सर्वसम्मत/सकारात्मक सहमति अनिवार्य है। बोर्ड की बैठक में 4:1 से प्रस्ताव पास होने के बावजूद, ट्रस्ट के दो नामित निदेशकों में से एक ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया था। ट्रस्ट्स के मुताबिक, दो में से बहुमत दो का ही होता है, इसलिए यह शर्त पूरी नहीं हुई और फैसला कानूनी रूप से निष्प्रभावी हो जाता है।
ट्रस्ट्स ने बोर्ड की ओर से दिए गए ‘कास्टिंग वोट’ (निर्णायक मत) के तर्क को भी खारिज किया है। टाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि खुद टाटा संस ने साइरस मिस्त्री विवाद के दौरान सुप्रीम कोर्ट में इन्हीं ‘अफर्मेटिव वोटिंग राइट्स’ का बचाव किया था और शीर्ष अदालत ने इसे सही ठहराया था। ऐसे में अब टाटा संस अपनी सुविधा के अनुसार अपने ही नियमों को नजरअंदाज नहीं कर सकती।




