बिना लक्षण वाली डायबिटीज: जब शरीर नहीं देता कोई संकेत, तब कैसे पहचानें यह ‘खतरनाक जाल’?

Lucknow Focus News Desk: क्या आपको लगता है कि अगर आप फिट महसूस कर रहे हैं, तो आपको डायबिटीज नहीं हो सकती? अगर हां, तो आपको अपनी सोच बदलने की जरूरत है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि टाइप-2 डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो कई बार बिना किसी शोर-शराबे के शरीर में घर कर लेती है। जब तक मरीज को इसका पता चलता है, तब तक शरीर के अंगों को काफी नुकसान पहुंच चुका होता है।
प्री-डायबिटीज: 5-6 साल तक छिपा रह सकता है खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादातर लोग टाइप-2 डायबिटीज के शिकार होते हैं। इसकी शुरुआत अक्सर ‘प्री-डायबिटीज’ से होती है। यह वह चरण है जहां ब्लड शुगर का स्तर बढ़ा हुआ तो होता है, लेकिन इतना नहीं कि वह स्पष्ट लक्षण दिखाए।
विशेषज्ञ बताते हैं कि इंसुलिन रेजिस्टेंस की यह स्थिति शरीर में 5 से 6 साल तक दबी रह सकती है। इस दौरान मरीज को लगता है कि वह बिल्कुल ठीक है, जबकि उसका मेटाबॉलिज्म अंदर ही अंदर बिगड़ रहा होता है।
इन ‘मामूली’ संकेतों को न करें नजरअंदाज
अक्सर लोग इन लक्षणों को थकान या उम्र का असर मानकर टाल देते हैं, लेकिन ये डायबिटीज की आहट हो सकते हैं।
मामूली थकान: बिना ज्यादा काम किए भी शरीर थका-थका रहना।
त्वचा के संक्रमण: बार-बार फंगल इन्फेक्शन या छोटे-मोटे घावों का जल्दी न भरना।
हल्की प्यास: सामान्य से थोड़ी ज्यादा प्यास महसूस होना।
धुंधली नजर: कभी-कभी आंखों के सामने धुंधलापन आना।
हम जांच से क्यों कतराते हैं?
भारत में एक बड़ी समस्या हमारी मानसिकता है। हम तब तक डॉक्टर के पास नहीं जाते जब तक कि दर्द या तकलीफ बर्दाश्त से बाहर न हो जाए। जागरूकता की कमी के कारण लोग रूटीन चेकअप (HBA1C या फास्टिंग शुगर टेस्ट) नहीं करवाते। यही वजह है कि डायबिटीज को ‘साइलेंट’ तरीके से बढ़ने का पूरा मौका मिल जाता है।
बचाव के लिए क्या करें?
डॉक्टरों का कहना है कि अब कम उम्र के युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। इससे बचने के तीन सुनहरे नियम हैं।
अगर आपकी उम्र 30 से ऊपर है या परिवार में डायबिटीज का इतिहास है, तो साल में कम से कम दो बार शुगर चेक कराएं।
रोजाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलें या व्यायाम करें।
डाइट में मीठा और रिफाइंड कार्ब्स (मैदा, चीनी) कम करें और वजन को काबू में रखें।
याद रखें, डायबिटीज का समय पर पता चलना ही उससे बचने का सबसे कारगर तरीका है।




