यूपी के 21 जिलों में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान शुरू, जेपी नड्डा ने वर्चुअल माध्यम से किया उद्घाटन

Lucknow Focus News Desk: फाइलेरिया उन्मूलन के लिए निर्णायक होने जा रहे सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान की मंगलवार को शुरुआत हुई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने वर्चुअल माध्यम से अभियान का शुभारंभ किया। इस मौके पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, स्वास्थ्य राज्यमंत्री मयंकेशवर शरण सिंह, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित घोष, स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवेल समेत प्रदेश के 21 जिलों के जिलाधिकारी जुड़े। प्रदेश के 21 जिलों के 64 ब्लॉक में इस बार एमडीए चलाया जाएगा।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने फाइलेरिया उन्मूलन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि यह बीमारी भारत में एक गंभीर जन स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। यह रोगी को शारीरिक रूप से अक्षम करने के साथ ही उसके पूरे परिवार पर भी सामाजिक और आर्थिक बोझ डालती है। इसलिए सामूहिक प्रयासों से इसे जन आन्दोलन का रूप देना आवश्यक है। जब तक हर पात्र व्यक्ति दवा का सेवन नहीं करेगा, तब तक हम इस बीमारी को समाप्त नहीं कर सकते। उन्होंने बताया कि यह अभियान उत्तर प्रदेश समेत देश के 12 राज्यों के 124 जिलों में चलाया जएगा। सभी सरकारी व निजी अस्पतालों में बूथ लगाए जाने चाहिए।
प्रदेश सरकार फाइलेरिया मुक्त राज्य के लक्ष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध
इस मौके पर विधान भवन, लखनऊ में उपस्थित उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि प्रदेश सरकार फाइलेरिया मुक्त राज्य के लक्ष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मंगलवार से 28 फरवरी तक चलने वाले इस अभियान के दौरान आशा व अन्य स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर 1 करोड़ 40 लाख लोगों को अपने सामने फाइलेरिया-रोधी दवा खिलाएंगे। इस अभियान का उद्देश्य 90 प्रतिशत से अधिक पात्र आबादी को दवा का सेवन कराकर फाइलेरिया के संक्रमण की कड़ी को तोड़ना है। अभियान का मुख्य संदेश है हमारा संकल्प – फाइलेरिया से मुक्ति।
उन्होंने बताया कि फाइलेरिया मच्छर-जनित रोग है। इसके लक्षण अक्सर 10–15 वर्षों बाद दिखाई देते हैं। इस तरह ज्यादातर लोग फाइलेरिया के लक्षणहीन वाहक हैं जो आगे संक्रमण फैला सकते हैं। इसलिए सभी का एक साथ दवा खाना बेहद ज़रूरी है। समय पर दवा सेवन से इसे पूरी तरह रोका जा सकता है। मैं सभी नागरिकों से अपील करता हूँ कि स्वास्थ्यकर्मियों के सामने दवा अवश्य खाएँ और इस अभियान को सफल बनाएँ। नागरिकों से अनुरोध है कि वे किसी भी भ्रम में न आएँ, खाली पेट दवा न लें और स्वास्थ्यकर्मियों का सहयोग करें।”
अभियान के तहत एक वर्ष से अधिक आयु के सभी पात्र व्यक्तियों को विश्व स्वस्थ्य संगठन द्वारा अनुशंसित दवाएं – आइवरमेक्टिन, डाइएथाइलकार्बामाजीन (DEC) और एल्बेंडाजोल आयु के अनुसार दी जाएगी। गर्भवती महिलाएँ, एक वर्ष से कम आयु के बच्चे और गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को दवा नहीं दी जाएगी। दवाएँ सामान्यतः सुरक्षित हैं और कुछ मामलों में हल्के, अस्थायी लक्षण जैसे मतली या थकान हो सकती है, जो जल्द ठीक हो जाते हैं। किसी भी आपात स्थिति के लिए रैपिड रिस्पॉन्स टीमें तैनात रहेंगी।
पाँच-स्तम्भीय रणनीति से उन्मूलन के प्रयासों में आई तेज़ी
राज्य फाइलेरिया अधिकारी डॉ.ए के चौधरी ने बताया कि फाइलेरिया उन्मूलन के लिए प्रदेश में पाँच-स्तम्भीय रणनीति अपनाई गई है, जिसमें सर्वजन दवा सेवन, रोग प्रबंधन एवं रोकथाम, मच्छर नियंत्रण, उच्च-स्तरीय अंतर-विभागीय समन्वय और नवाचारी उपाय शामिल हैं। पंचायती राज, शिक्षा, शहरी व ग्रामीण विकास तथा महिला एवं बाल विकास विभागों के सहयोग से इस अभियान को जन-आंदोलन का रूप दिया जा रहा है। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि यह अभियान आने वाली पीढ़ियों को फाइलेरिया से सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, और इसकी सफलता में प्रत्येक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है।
इन जिलों में चलेगा अभियान
अभियान में सबसे ज्यादा शाहजहांपुर के 13 ब्लाक हैं। इसके बाद बलिया के 12, बाराबंकी के सात, उन्नाव व चित्रकूट के चार-चार ब्लाक में यह अभियान चलाया जाएगा। इसके अलावा प्रतापगढ़ में तीन, हरदोई, प्रयागराज, सोनभद्र, कौशांबी, अयोध्या व भदोही में दो-दो ब्लाक में एमडीए अभियान चलाया जाएगा। लखनऊ के माल ब्लाक समेत रायबरेली, अंबेडकरनगर, खीरी, पीलीभीत, औरेया, बांदा, फतेहपुर व बहराइच में सिर्फ एक-एक ब्लाक में फाइलेरिया रोधी दवाएं खिलाई जाएंगी।




