सीएम योगी का सख्त निर्देश: ‘बजट खर्च में लाएं तेजी, देरी करने वाले अफसरों की तय होगी जवाबदेही’

Lucknow Focus News Desk: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को वित्त विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा बजट खर्च की धीमी प्रगति पर कड़ा रुख अपनाया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विकास परियोजनाओं में देरी और बजट का समय पर उपयोग न होना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को ‘निर्णय लेने का सामर्थ्य’ विकसित करने और हर स्तर पर जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए।
मुख्य 20 विभागों की समीक्षा और कड़े निर्देश
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के उन 20 प्रमुख विभागों के प्रस्तुतिकरण को देखा जिन्हें सबसे अधिक बजट आवंटित किया गया है। बैठक के मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे।
बजट खर्च न होने की स्थिति में अब केवल विभाग नहीं, बल्कि हर स्तर के संबंधित अधिकारी की व्यक्तिगत जवाबदेही और जिम्मेदारी तय की जाएगी।
जिन विभागों में खर्च की प्रगति धीमी है, उनके मंत्रियों को मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से सीधे पत्र जारी कर जवाब मांगा जाएगा।
सीएम ने कहा कि अफसर फाइलें न दबाएं। निर्णय लेने में देरी के कारण योजनाएं धरातल पर नहीं उतर पातीं, इसलिए तत्काल फैसले लें।
जिन योजनाओं में केंद्र सरकार से फंड मिलना है, उसके लिए विभागीय मंत्रियों और अपर मुख्य सचिवों को खुद दिल्ली जाकर पैरवी करने और फॉलोअप लेने को कहा गया है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट की तैयारी शुरू
मुख्यमंत्री ने न केवल वर्तमान बजट बल्कि अगले वित्तीय वर्ष की कार्ययोजना पर भी निर्देश दिए।
वित्त विभाग को निर्देश दिया गया है कि आगामी बजट आवंटित करने से पहले विभागों के पिछले 5 वर्षों के खर्च के रिकॉर्ड की समीक्षा की जाए।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अभी से सभी विभागों के साथ बैठक कर उनकी मांगों का आकलन शुरू करने को कहा गया है।
समन्वय पर जोर
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि विभागीय मंत्री और अधिकारी हर महीने बैठक कर बजट व्यय की समीक्षा करें। वित्त विभाग को भी आदेश दिया गया कि किन्हीं कारणों से रुकी हुई स्वीकृतियों और अवशेष बजट को तत्काल जारी किया जाए ताकि विकास कार्य बाधित न हों।




