उत्तर प्रदेश

लखनऊ में ‘अवधी समारोह 2025’ संपन्न: अवधी साहित्य को समृद्ध बनाने पर ज़ोर

Lucknow Focus News Desk: उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के अवधी प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित ‘अवधी समारोह 2025’ में अवधी भाषा, साहित्य और संस्कृति की समृद्ध परंपरा पर गहन चर्चा हुई। यह आयोजन चार सत्रों में संपन्न हुआ।

उद्घाटन सत्र: अवधी की गरिमा और विरासत

समारोह के मुख्य अतिथि विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान ने अवधी भाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि, “अवधी भाषा साहित्य और संस्कृति की परंपरा अत्यंत प्राचीन और समृद्ध है। यह मात्र बोली नहीं, अपितु इसे भाषा का गरिमामयी स्थान प्राप्त है। विशेष तथ्य है कि भगवान राम और भगवान बुद्ध अवध और अवधी की पावन माटी में पैदा हुए हैं।”

समारोह की अध्यक्षता पद्मश्री डॉ. विद्याबिंदु सिंह ने की। उन्होंने इस अवसर पर विमोचित हुए अवधी शोध ग्रंथ ‘अवध-अवधी विविध संदर्भ’ के बारे में बोलते हुए कहा कि डॉ. राम बहादुर मिश्रा नैसर्गिक प्रतिभा संपन्न ऐसे अवधी साहित्यिक साधक हैं, जिनकी समूची तल्लीनता सिर्फ और सिर्फ अवधी को समर्पित है। उन्होंने डॉ. मिश्रा को अवधी का आंदोलन और अवधी का ध्वजवाहक बताया।

प्रबंध संपादक इंजीनियर रमाकांत “रामिल” ने ग्रंथ को डॉ. राम बहादुर मिश्रा की अवधी साधना को समर्पित सारस्वत सृजन बताया, जो प्रकारांतर से अवधी का एनसाइक्लोपीडिया है।

संपादक डॉ. शिव प्रकाश अग्निहोत्री ने इसे अवधी भाषा, साहित्य और संस्कृति की समृद्ध परंपरा का आख्यान बताया, जिसमें अवधी के वैश्विक परिदृश्य और बौद्धिक विरासत का महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

समकालीन परिदृश्य और शोध गतिविधियां

अवधी शोध ग्रंथ के लेखक डॉ. राम बहादुर मिश्र ने अवधी भाषा के समकालीन परिदृश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अवधी साहित्य सृजन हिंदी के समानांतर अबाध गति से विस्तार पा रहा है। उन्होंने बताया कि अवधी में कहानी, उपन्यास, लघु कथा, यात्रा वृतांत, निबंध, एकांकी, नाटक, रेडियो वार्ता, रेडियो रूपक, पत्र साहित्य, गीत, नवगीत, मुक्तक, ग़ज़ल सहित पारंपरिक काव्य विधाओं से समृद्ध है।

केएमसी भाषा विश्वविद्यालय लखनऊ के भाषा समन्वयक डॉ. नीरज शुक्ला ने अवधी शोध पीठ की गतिविधियों की जानकारी दी और निकट भविष्य में अवधी डिप्लोमा शुरू करने की चर्चा की।

नेपाल से आए अवधी विद्वानों ने नेपाल में अवधी की वर्तमान दशा और दिशा पर विस्तार से विचार रखे। ग्रंथ के समन्वयक डॉ. संतलाल ने बताया कि यह शोध ग्रंथ सर्वाधिक रूप से शोधार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है।

विभिन्न सत्र और सहभागिता

साहित्य सभा के संस्थापक सर्वेश अस्थाना ने उपस्थित साहित्यकारों का स्वागत किया। समारोह चार सत्रों में संपन्न हुआ, जिसमें आठ संस्थाओं (अवध भारती संस्थान, अवधी विकास संस्थान लखनऊ, अवधी साहित्य संस्थान अमेठी, बिरजू संस्थान बाराबंकी आदि) ने सहभागिता की।

उद्घाटन सत्र: संचालन वरिष्ठ अवधी साहित्यकार प्रदीप सारंग और आभार प्रदर्शन अवधी साहित्य संस्थान अमेठी के अध्यक्ष प्रोफेसर अर्जुन पांडे ने किया।

विचार सभा (दूसरा सत्र): विषय प्रवर्तन व संचालन नागेंद्र बहादुर सिंह चौहान ने किया, आभार प्रदर्शन बिरजू संस्थान के अध्यक्ष रत्नेश कुमार ने किया।

सांस्कृतिक संध्या (तीसरा सत्र): संयोजन और संचालन प्रसिद्ध लोक गायिका कुसुम वर्मा ने किया।

अवधी कवि सम्मेलन (चौथा सत्र): संचालन हास्य व्यंग्य के कवि अजय प्रधान ने किया।

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