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चना या जौ का सत्तू, कौन सा है ज़्यादा फायदेमंद? जानिए आपकी सेहत के लिहाज से सही विकल्प

Lucknow Focus News Desk: भारत की पारंपरिक रसोई में कई ऐसे देसी सुपरफूड्स हैं जो न सिर्फ स्वाद में बेहतरीन हैं, बल्कि पोषण के लिहाज से भी बेहद समृद्ध हैं। सत्तू उनमें से एक है। यह एक ऐसा पौष्टिक खाद्य पदार्थ है जिसे प्राचीन समय से उत्तर भारत में विशेष रूप से गर्मियों में इस्तेमाल किया जाता रहा है। बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में सत्तू का सेवन आम है और इसे अक्सर “गरीबों का प्रोटीन” कहा जाता है।

सत्तू शरीर को ठंडक देने, एनर्जी बढ़ाने और भूख को लंबे समय तक कंट्रोल में रखने के लिए जाना जाता है। लेकिन सवाल यह है कि जौ का सत्तू और चना का सत्तू इन दोनों में से किसका सेवन ज्यादा फायदेमंद होता है? आइए जानते हैं दोनों के गुण और आपके लिए कौन-सा बेहतर विकल्प हो सकता है। चने का सत्तू भूने हुए चनों को पीसकर तैयार किया जाता है। यह प्रोटीन, फाइबर, आयरन और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होता है।

मुख्य लाभ

  • उच्च प्रोटीन कंटेंट: खासतौर पर शाकाहारी लोगों के लिए यह प्रोटीन का सस्ता और प्रभावी स्रोत है।
  • पाचन में सहायक: इसमें मौजूद फाइबर कब्ज और अन्य पाचन समस्याओं से राहत दिलाता है।
  • ब्लड शुगर कंट्रोल: डायबिटीज के मरीजों के लिए यह एक सुरक्षित विकल्प हो सकता है क्योंकि यह ग्लाइसेमिक इंडेक्स को नियंत्रित करता है।
  • वजन घटाने में मदद: लंबे समय तक पेट भरा रखने की वजह से यह ओवरईटिंग से बचाता है।

जौ का सत्तू: गर्मियों का नेचुरल कूलर

जौ, जिसे बार्ली भी कहा जाता है, आयुर्वेद में एक गुणकारी अनाज माना गया है। जौ का सत्तू खासकर गर्मियों में शरीर को ठंडक पहुंचाने और लू से बचाव के लिए बेहतरीन माना जाता है।

  • थर्मल बैलेंस: गर्मियों में शरीर को ठंडा रखता है और लू से बचाता है।
  • डिटॉक्सिफाइंग इफेक्ट: शरीर से टॉक्सिंस निकालने में मदद करता है।
  • कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक: इसमें मौजूद वॉटर-सोल्यूबल फाइबर एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है।
  • पाचन के लिए फायदेमंद: हल्का और सुपाच्य होता है।

आपके लिए कौन-सा सत्तू है सही?

सवाल यह नहीं कि कौन-सा सत्तू बेहतर है, बल्कि यह कि आपकी सेहत और ज़रूरत के अनुसार कौन-सा उपयुक्त है।

आवश्यकता    बेहतर विकल्प

  1. मसल्स बनाना / प्रोटीन की ज़रूरत   चना सत्तू
  2. गर्मी में ठंडक और लू से बचाव  –    जौ सत्तू
  3. वजन घटाना  दोनों उपयोगी, लेकिन चना अधिक असरदार
  4. डायबिटीज या हार्ट पेशेंट –   जौ सत्तू ज़्यादा सुरक्षित

दोनों ही प्रकार के सत्तू अपने-अपने गुणों में बेजोड़ हैं। यदि आपका लक्ष्य प्रोटीन इनटेक बढ़ाना और मांसपेशियों को मजबूत बनाना है, तो चने का सत्तू आपके लिए अधिक लाभकारी रहेगा। वहीं अगर आप गर्मियों में शरीर को ठंडक देना चाहते हैं और डिटॉक्स की जरूरत है, तो जौ का सत्तू बेहतर विकल्प है। सही जानकारी के साथ अपने शरीर की जरूरतों को समझकर सत्तू का चयन करें और इस देसी सुपरफूड का अधिकतम लाभ उठाएं।

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