एआई कंपनियों के वैल्यूएशन में गिरावट से भारत में बढ़ सकता है पूंजी प्रवाह: RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा

Lucknow Focus News Desk: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के अत्यधिक वैल्यूएशन में यदि कोई सुधार या कमी आती है, तो इससे भारत जैसे उभरते बाजारों में विदेशी पूंजी का प्रवाह (Capital Inflow) बढ़ सकता है। नई दिल्ली में आयोजित ‘कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव 2026’ में बोलते हुए गवर्नर ने एआई से जुड़े अत्यधिक वैल्यूएशन को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली के सामने मौजूद 5 प्रमुख चिंताओं में से एक बताया।
वक्तव्य और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय जोखिमों के मुख्य बिंदु
गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि हाल के वर्षों में एआई क्षेत्र में तेजी से हुआ निवेश ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट का मुख्य चालक रहा है। यदि विकसित देशों में एआई संपत्तियों के मूल्यों में कोई बड़ा करेक्शन (सुधार) होता है, तो वैश्विक निवेशक भारत की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे घरेलू बाजार में पूंजी प्रवाह सकारात्मक रूप से बढ़ेगा।
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली के 5 बड़े जोखिम
एआई से जुड़ी कंपनियों का अत्यधिक और असंतुलित वैल्यूएशन।
वैश्विक स्तर पर लगातार बढ़ता कर्ज (Global Debt)।
नॉन-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र में अत्यधिक लीवरेज (उधार लेकर निवेश करना)।
प्राइवेट क्रेडिट एक्सपोजर में अनियंत्रित बढ़ोतरी।
साइबर सुरक्षा से जुड़ी बढ़ती चुनौतियां और खतरे।
गवर्नर ने स्पष्ट किया कि हालांकि कमोडिटी की कीमतों और ग्लोबल फाइनेंशियल हालातों से बाहरी झटकों की संवेदनशीलता बनी हुई है, लेकिन भारत का मैक्रोइकोनॉमिक आधार (Macroeconomic Fundamentals) और बैंकों व NBFCs की बैलेंस शीट बेहद मजबूत है। फिलहाल किसी तात्कालिक वित्तीय संकट के संकेत नहीं हैं, परंतु सतर्क रहना आवश्यक है।




