वास्तुकला छात्रों की महाभारत प्रस्तुति, ‘धर्म-अधर्म’ का मंचन, जहां डिजाइन और कला ने भरी जान

Lucknow Focus News Desk: लखनऊ में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के वास्तुकला एवं योजना संकाय के छात्रों ने कला और इंजीनियरिंग के संगम से एक अनूठी मिसाल पेश की है। 20 सितंबर 2025, शनिवार को संकाय के ओपन एयर थिएटर में भारतीय महाकाव्य महाभारत का एक भव्य नाट्य मंचन किया गया। यह प्रस्तुति संकाय के ड्रामा क्लब के साथ-साथ आर्ट और मीडिया क्लब का एक शानदार सामूहिक प्रयास था।
कला और वास्तुकला का संगम
यह प्रस्तुति सिर्फ एक नाटक नहीं, बल्कि जीवन के दर्शन और संघर्षों का एक गहरा मंचन था। छात्रों ने महाभारत की शाश्वत कथा को आधुनिक परिप्रेक्ष्य से जोड़ते हुए पांडवों और कौरवों की गाथा, धर्म और अधर्म के संघर्ष और जीवन के जटिल प्रश्नों को जीवंत किया। इस प्रस्तुति की सबसे खास बात थी वास्तुकला की पृष्ठभूमि से जुड़े छात्रों द्वारा अभिनव तरीके से तैयार किए गए सेट डिजाइन, जिन्होंने मंच को एक नई जीवंतता और गहराई प्रदान की।
मंच सज्जा, परिधान, ध्वनि और प्रकाश संयोजन सभी छात्रों की रचनात्मकता और सामूहिक प्रयास की उत्कृष्ट अभिव्यक्ति थे।
कलाकारों और टीम का योगदान
इस भव्य मंचन में छात्रों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। नाटक का निर्देशन देव मोहिनी दत्ता ने किया, जबकि लेखन का जिम्मा अब्दुल कलाम का था। संगीत अनुज्ञा, उत्कर्ष और कात्यायनी ने संभाला और भेषभूषा जानवी सिंह द्वारा तैयार की गई। मंच की भव्यता के पीछे मॉडल क्लब और आर्ट क्लब का हाथ था।
इस अवसर पर संकायाध्यक्ष ने कहा, “महाभारत सिर्फ एक कथा नहीं, बल्कि जीवन का दर्शन है। हमारे छात्रों ने इसे जिस नवीनता और गहराई से मंचित किया है, वह बेहद प्रेरणादायक है।” यह नाट्य आयोजन छात्रों के समग्र व्यक्तित्व विकास को दर्शाता है, जहाँ उन्होंने अपनी सृजनशीलता, अनुशासन और कला के प्रति संवेदनशीलता का परिचय दिया।
लखनऊ में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के वास्तुकला एवं योजना संकाय के छात्रों द्वारा प्रस्तुत महाभारत के भव्य मंचन में कई प्रतिभाशाली कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। नाटक में मुख्य भूमिकाएं निभाने वाले कलाकारों के नाम इस प्रकार हैं:
- युधिष्ठिर: अमूल
- भीम: हंसज
- अर्जुन: शौर्य सक्सेना
- सहदेव: ऋतिक
- नकुल: शौर्य वर्मा
- कर्ण: विदित
- दुर्योधन: वंश
- दुशासन: अभिषेक
- धृतराष्ट्र: आशुमेंद्र
- विदुर: पेशल
- कृष्ण: आदित्य श्रीवास्तव
- शकुनि: आदित्य टंडन
- यक्ष: स्पर्श
- अभिमन्यु: स्पर्श
- द्रष्टद्युम्न: सचिन
- जयद्रथ: अमरेश
- द्रौपदी के पिता: अंकित
- द्रौपदी: सृष्टि
यह नाटक इन कलाकारों के साथ-साथ पूरी टीम के सामूहिक प्रयास का नतीजा था, जिसमें निर्देशन से लेकर संगीत और भेष-भूषा तक, सभी छात्रों ने मिलकर एक यादगार प्रस्तुति दी।
Also Read: जल संरक्षण हर नागरिक का कर्तव्य : डॉ. राजेश कुमार सिंह




